11 साल पुराना घोटाला फिर जिंदा, स्मारक निर्माण में शामिल अफसरों पर गिरेगी गाज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्मारकों के निर्माण से जुड़े करीब 1400 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में वर्षों की खामोशी के बाद अब कार्रवाई की रफ्तार तेज हो गई है। विजिलेंस में वर्ष 2014 में दर्ज मुकदमे के आधार पर चल रही जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। इस कड़ी में लखनऊ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता के खिलाफ सीधी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।

लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने एलडीए सचिव को आदेश दिया है कि जांच से संबंधित सभी अभिलेख और तकनीकी दस्तावेज बिना देरी उपलब्ध कराए जाएं, ताकि रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को सौंपी जा सके।

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बसपा शासनकाल में हुआ था भारी वित्तीय अनियमितता का खेल

यह कथित घोटाला वर्ष 2007 से 2011 के बीच सामने आया, जब तत्कालीन बसपा सरकार के दौरान लखनऊ और नोएडा में भव्य स्मारकों और उद्यानों का निर्माण कराया गया था। इन परियोजनाओं में अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, मान्यवर कांशीराम स्मारक, गौतम बुद्ध उपवन, कांशीराम इको ग्रीन गार्डन और नोएडा का अंबेडकर पार्क शामिल हैं।

जांच में सामने आया कि इन निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर पत्थरों की खरीद की गई, जिसमें कीमतों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर भारी अनियमितताएं की गईं। इसी प्रक्रिया में लगभग 1400 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप सामने आया। इन परियोजनाओं के लिए 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी गई थी, जबकि लगभग 41,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

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57 अफसर जांच के घेरे में

इस प्रकरण में केवल एलडीए ही नहीं, बल्कि राजकीय निर्माण निगम से जुड़े कई अधिकारी भी जांच के दायरे में आए हैं। अब तक की जांच में निर्माण निगम और एलडीए से जुड़े करीब 57 अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

 

शासन ने 22 दिसंबर 2025 को इस मामले में स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए लखनऊ मंडलायुक्त को जांच शीघ्र पूरी कर कार्रवाई संबंधी रिपोर्ट शासन को भेजने को कहा है। अधिकारियों का कहना है कि इतने वर्षों बाद भी यदि दोष सिद्ध होता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कदम

INPUT- PRIYANSHU PANDEY

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