भिवानी
लकड़ी के जिस कार्य को ज्यादा तवज्जों नहीं दी जाती, भिवानी के छोटे से गांव सिवाड़ा के युवा को कारपेंटरी के कार्य ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी है।
महज 20 साल के युवा पंकज जांगड़ा ने शंघाई में हुई वर्ल्ड स्किल शंघाई 2026 प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के प्रतिभागियों के बीच अपनी तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और मेहनत का शानदार प्रदर्शन किया।
वे भारत की ओर से पहले ऐसे प्रतिभागी बने जिन्होंने कारपेंटरी प्रतियोगिता में अपना हाउस स्ट्रक्चर का प्रोजेक्ट पूरा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवा की सराहना करते हुए अपनी स्कील पर और ध्यान देने और नए बच्चों को तैयार करने का संदेश दिया।
पंकज ने अपनी प्रतिभा से दर्शा दिया है कि किताबी शिक्षा के साथ तकनीकी प्रशिक्षण के दम पर भी युवा अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकते है। निरंतर अभ्यास से उन्होंने कारपेंटरी के क्षेत्र में खुद को साबित किया।
उनका यह सफर घर से शुरू हुआ। पंकज के पिता बिजेंद्र जांगड़ा गांव में ही लकड़ी का काम करते हैं। उन्होंने पिता से ही कारपेंटरी के बेसिक गुर सीखे।
इसके बाद 2024 में स्किल प्रतियोगिता के प्रति गंभीर हुआ और जिलास्तरीय प्रतियोगिता में भाग लिया। यहां से महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक में हुई राज्यस्तरीय और फिर राष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया।
दिल्ली में भी लिया था भाग
राष्ट्रीय स्पर्धा में सिल्वर मेडल मिलने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा का मौका नहीं मिला मगर इस टीस को मन में रख फिर अभ्यास पर फोकस किया। जिलास्तर पर गोल्ड जीता। पंकज ने 2026 में दिल्ली में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया और इस बार राष्ट्रीय स्पर्धा में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए।
प्रतियोगिता के नियमानुसार अगली बार प्रतियोगिता में भाग लेने पर पदक नहीं मिलता। इस कारण पदक तो नहीं मिला मगर सीधे प्रवेश जरूर मिला।
उन्होंने बैंगलुरू में तीन चरण के मॉक टेस्ट में भी अपने प्रतिद्वंदियों को मात दी। जिस कारण उन्हें चीन के शंघाई में हुई विश्व कौशल प्रतियोगिता में जोहर दिखाने का मौका मिला।
22 घंटे में बनाया हाउस स्ट्रक्चर
पूरी तैयारी के साथ गए पंकज के सामने विभिन्न अलग-अलग देशों के 166 प्रतिभागी थे। प्रतियोगिता में पंकज को 22 घंटे में हाउस स्ट्रक्चर बनाने का प्रोजेक्ट दिया गया। अब तक 2020, 2024 में हुई विश्व कौशल प्रतियोगिता के कारपेंटिंग वर्ग में कोई भी भारतीय अपना प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पाया।
इस बार पंकज पदक तो नहीं जीत पाए मगर अपना प्रोजेक्ट बेहतरीन तरीके से पूरा कर खूब वाहवाही लूटी। पंकज अब राष्ट्रीयस्तरीय कारपेंटिंग का बिजनेस करने लक्ष्य रखे हैं ताकि अन्य युवाओं को भी तैयार कर सके।
पंकज ने बताया कि पिता बिजेंद्र का उनकी सफलता में अहम भूमिका है। उन्हीं की बदौलत वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंच पाया।
प्रधानमंत्री से मिलकर उत्साहित है पंकज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को विश्व कौशल प्रतियोगिता में शामिल रहे भारतीय दल के सदस्यों को मुलाकात के लिए बुलाया। भिवानी के पंकज जांगड़ा को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का मौका मिला। जिससे वह काफी उत्साहित है।
पंकज बताते हैं कि प्रधानमंत्री ने उन्हें कहा कि अपनी स्किल पर ध्यान दो और नए बच्चों को भी सीखाओ। पंकज अहमदाबाद से बीएससी फर्नीचर डिजाइन एंड मैनूफेक्चरिंग कोर्स कर रहे है। इसके अलावा उन्होंने मणिपाल कालेज आफ हायर एजूकेशन बैंगलोर से भी छह माह की ट्रेनिंग ली है।














