एवरेस्ट के 4 लोकप्रिय मसाले क्वालिटी टेस्ट में फेल, लैब रिपोर्ट में बैक्टीरिया और पेस्टिसाइड्स की अधिकता, स्वास्थ्य पर क्या असर?

नई दिल्ली/लखनऊ, 10 मार्च 2026: भारतीय रसोई का एक बड़ा नाम एवरेस्ट मसाले अब विवादों में घिर गया है। एक स्वतंत्र यूट्यूब चैनल Trustified ने 1 मार्च 2026 को अपलोड किए गए वीडियो में दावा किया है कि एवरेस्ट के चार प्रमुख मसाले—गरम मसाला, किचन किंग मसाला, कश्मीरी लाल (चिली पाउडर) और मीट मसाला—लैब टेस्ट में FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) के सेफ लिमिट से बाहर पाए गए। ये सैंपल दिल्ली-एनसीआर के D-Mart से खरीदे गए थे, जहां से तीन-तीन बॉक्स खरीदकर एक को लैब भेजा गया। रिपोर्ट में मुख्य रूप से एंटेरोबैक्टीरियेसी (Enterobacteriaceae) बैक्टीरिया और कई पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) की अधिक मात्रा मिली है।

यह खुलासा घरेलू खाने की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है, खासकर जब पहले दूध, दही, पनीर और खोए में मिलावट की खबरें आ चुकी हैं। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स, क्या मिला लैब में और इससे स्वास्थ्य को कितना खतरा है।

लैब टेस्ट में क्या पाया गया? चारों मसालों की रिपोर्ट

Trustified के अनुसार, सभी चार मसाले FSSAI मानकों पर खरे नहीं उतरे। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

एवरेस्ट गरम मसाला: दो पेस्टिसाइड्स— एसिटामिप्रिड और एज़ोक्सीस्ट्रोबिन—FSSAI की सेफ लिमिट से ज्यादा मिले। साथ ही एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया भी तय मात्रा से अधिक पाया गया।
एवरेस्ट किचन किंग मसाला: तीन पेस्टिसाइड्स—थियामेथॉक्सम, कार्बेन्डाज़िम/बेनोमिल और कार्बेन्डाज़िम—अधिक मात्रा में मिले। एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया भी लिमिट से बाहर।
एवरेस्ट कश्मीरी लाल (चिली पाउडर): कोई पेस्टिसाइड लिमिट से ज्यादा नहीं मिला, लेकिन एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया तय सीमा से अधिक मौजूद था।
एवरेस्ट मीट मसाला: चार पेस्टिसाइड्स—एथियन, टेबुकोनाज़ोल, एज़ोक्सीस्ट्रोबिन और फ्लूओपायरम—सेफ लिमिट से ज्यादा। एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया भी अधिक मात्रा में।

ये नतीजे बताते हैं कि मसालों में बैक्टीरियल कंटैमिनेशन (संक्रमण) और कीटनाशक अवशेष दोनों की समस्या है।

एंटेरोबैक्टीरियेसी बैक्टीरिया क्या है? स्वास्थ्य पर असर
डॉ. नीरज गोयल (धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली में GI सर्जरी एवं GI ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर) के अनुसार, एंटेरोबैक्टीरियेसी एक बड़ी फैमिली है जिसमें ई.कोलाई, साल्मोनेला, क्लेबसिएला जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं। ये आमतौर पर आंत में रहते हैं और कम मात्रा में हानिरहित होते हैं। लेकिन मसालों में अधिक मात्रा का मतलब है कि मसाले ठीक से सुखाए, साफ किए या हैंडल नहीं किए गए।

लंबे समय तक ऐसे मसाले खाने से

दस्त, पेट दर्द, उल्टी, फूड पॉइजनिंग।
पेट के इंफेक्शन।
बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में ज्यादा खतरा।

पेस्टिसाइड्स का खतरा: लिवर, नर्व्स और आंतों पर असर
पेस्टिसाइड्स खेती या प्रोसेसिंग के दौरान अधिक इस्तेमाल या सफाई न होने से आते हैं। डॉ. गोयल बताते हैं कि लंबे समय तक अधिक एक्सपोजर से:
– एसिटामिप्रिड: नर्वस सिस्टम खराब, सिरदर्द, उल्टी।
– एज़ोक्सीस्ट्रोबिन: लिवर और आंतों को नुकसान।
– थियामेथॉक्सम: नसों पर असर, चक्कर, कमजोरी।
– एथियन: उल्टी, सांस की दिक्कत, नर्व डैमेज।

हालांकि मसाले कम मात्रा में खाए जाते हैं, इसलिए तुरंत बड़ा खतरा कम है, लेकिन लगातार इस्तेमाल से बॉडी में जमा हो सकता है।

क्या करें? सुरक्षित विकल्प और सलाह

घर पर साबुत मसाले खरीदकर पीसें।
पैकेज्ड मसाले खरीदें तो ड्राई रोस्ट करके इस्तेमाल करें।
मसाले सूखी, ठंडी जगह पर रखें; खुले मसाले कम खरीदें।
एक ब्रांड पर निर्भर न रहें; खाना अच्छे से पकाएं (बैक्टीरिया कम हो जाते हैं)।
अगर शक हो तो FSSAI या लैब टेस्ट करवाएं।

यह रिपोर्ट Trustified के वीडियो पर आधारित है, जो एक स्वतंत्र जांच है। एवरेस्ट कंपनी या FSSAI की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है (पिछले साल MDH-एवरेस्ट पर इथिलीन ऑक्साइड केस में भी जांच हुई थी)।

INPUT-ANANYA MISHRA

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