योगी का सख्त रुख, केशव का सम्मान संदेश, ब्रजेश का डैमेज कंट्रोल, शंकराचार्य विवाद पर UP सरकार के तीन सुर

लखनऊ:उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद तुल पकड़ता जा रहा। जहां अंक ओर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य जैसे पूज्य संत और आचार्य के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में संत समाज का सर्वोच्च सम्मान है और यदि किसी ने अपमानजनक कृत्य किया है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मौर्य ने कहा, “सरकार संत समाज का सम्मान करती है। किसी भी पूज्य संत, आचार्य या शंकराचार्य जी का अपमान हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं है। यदि किसी ने ऐसा किया है तो उसकी भूमिका की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी।” उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से अपील करते हुए कहा कि वे अपना विरोध समाप्त करें और संगम में स्नान करें, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा।

तो दूसरी ओर इस विवाद पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी विधानसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। “मैं भी कानून से ऊपर नहीं हूं। भारत के हर नागरिक को कानून का पालन करना चाहिए,”उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। उन्होंने व्यवस्था और प्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि जैसे कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री का बोर्ड लगाकर नहीं घूम सकता, उसी प्रकार धार्मिक पदों की भी एक मान्यता और परंपरा होती है। इससे पहले शंकराचार्य विवाद के बीच 22 जनवरी को सीएम योगी हरियाणा के सोनीपत में थे। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद का बिना नाम लिए कहा था किसी को परंपरा बाधित करने का हक नहीं। ऐसे तमाम कालनेमि हैं, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा। संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता

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अब इस पूरे मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है दरअसल डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आज लखनऊ स्थित अपने आवास पर 101 ब्राह्मण बटुकों को आमंत्रित कर पूजा-अर्चना की। पत्नी नम्रता पाठक के साथ उन्होंने सभी बटुकों का तिलक किया, पुष्पवर्षा की और हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार भी हुआ। करीब एक महीने तक इस मामले में चुप रहने के बाद हाल ही में एक मीडिया कार्यक्रम में ब्रजेश पाठक ने कहा था, “चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी। जो भी दोषी है, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। चोटी खींचना महाअपराध है, महापाप लगेगा।” हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था। ब्राह्मण समाज की नाराजगी की चर्चाओं के बीच ब्रजेश पाठक यह कदम डैमेज कंट्रोल की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

पूरा मामला अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। सत्ता पक्ष जहां संत समाज के सम्मान की बात कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।

INPUT-ANANYA MISHRA 

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