‘दुर्गा बन, काली बन पर कभी बुर्केवाली न बन…’, ग्वालियर में बोले धीरेंद्र शास्त्री

UP: ग्वालियर (Gwalior) के डबरा में आयोजित नवग्रह शक्ति पीठ के प्रतिष्ठा महोत्सव में पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने (Pandit Dhirendra Krishna Shastri) कथा के दूसरे दिन युवाओं और बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों पर चलने की सीख दी। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से कहा कि 18 से 25 वर्ष का समय जीवन का सबसे निर्णायक दौर होता है, इस उम्र में जो व्यक्ति संभल जाता है, उसका भविष्य सुरक्षित रहता है, जबकि जो भटक जाता है, उसे संभलना कठिन हो जाता है।

युवतियों को आत्मनिर्भर बनने की अपील

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने युवतियों से कहा कि वे स्वयं को शक्तिशाली और आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘तुम दुर्गा बनो, काली बनो, लेकिन कभी बुर्के वाली मत बनो।

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बच्चों के लिए जीवन के नियम

कथा में उन्होंने बच्चों को भी संबोधित किया और कहा कि माता-पिता की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बच्चों और युवाओं को गलत संगति से दूर रहने की सीख दी और चेतावनी दी कि जीवन में गलत संगति भटकाव का कारण बन सकती है।

चरित्र और संगत का महत्व

पंडित धीरेंद्र ने उदाहरण देकर बताया कि कोई किसी को नहीं बिगाड़ता, अगर व्यक्ति के भीतर खोट न हो। उन्होंने कहा कि राम के राज्य में रहकर मंथरा सुधरी नहीं और रावण के राज्य में रहकर विभीषण बिगड़े नहीं। इससे स्पष्ट होता है कि चरित्र और निर्णय व्यक्ति के अपने हाथ में होते हैं।

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सही मार्ग चुनने की प्रेरणा

कथा के माध्यम से उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे स्वयं को मजबूत बनाएं और जीवन में सही मार्ग का चुनाव करें। उनके इस संबोधन को सुनने के बाद कार्यक्रम में उपस्थित लोग इस संदेश पर गहन चर्चा करते नजर आए।

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