Gorakhpur: 27 साल पुराने गबन मामले में बड़ा एक्शन, Punjab & Sind Bank के तत्कालीन शाखा प्रबंधक जयदीप मित्रा वाराणसी से गिरफ्तार

UP: गोरखपुर (Gorakhpur) के कैंट थाने में 1999 का एक बड़ा बैंक गबन मामला अब 27 साल बाद सुलझने की ओर बढ़ रहा है। पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sindh Bank) की गोलघर शाखा (Golghar Branch) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक जयदीप मित्रा (Jaydeep Mitra) को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने वाराणसी से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने सगे-संबंधियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और उनमें अवैध रूप से धनराशि ट्रांसफर कर कुल 34,78,420 रुपये का गबन किया।

फर्जी खातों से की गई ठगी

ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि वर्ष 1999 में बैंक की गोलघर शाखा में तैनात शाखा प्रबंधक जयदीप मित्रा, कैशियर, क्लर्क और अन्य अधिकारियों ने मिलकर साजिश रची। उन्होंने अपने सगे-संबंधियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए और इन खातों में अवैध रूप से धनराशि स्थानांतरित की। इस तरह कुल 34,78,420 रुपये का गबन किया गया। मामले का पर्दाफाश होने के बाद बैंकिंग महकमे में हड़कंप मच गया था।

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ईओडब्ल्यू को सौंपी गई जांच

प्रारंभिक विवेचना स्थानीय पुलिस ने की, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के निर्देश पर 10 जुलाई 2000 को जांच आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दी गई। ईओडब्ल्यू की जांच में कुल नौ आरोपियों की संलिप्तता सामने आई। इनमें से अधिकांश आरोपियों को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका है। जबकि दो आरोपी – जयदीप मित्रा सहित लंबे समय से फरार चल रहे थे।

वाराणसी से दबिश देकर गिरफ्तारी

ईओडब्ल्यू टीम ने मुखबिर की सूचना पर बुधवार को वाराणसी में दबिश देकर जयदीप मित्रा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कानूनी प्रक्रिया के तहत न्यायालय में पेश किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मामले में शेष आरोपियों की तलाश जारी है और सभी के विरुद्ध साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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बैंकिंग महकमे में हड़कंप

यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में भ्रष्टाचार और फर्जी खातों के जरिए गबन के पुराने मामलों को फिर उजागर करता है। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई से विभागीय कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। पुलिस ने कहा कि जांच में यदि और कोई शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।

आगे की जांच

ईओडब्ल्यू ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। फर्जी खातों के माध्यम से ट्रांसफर हुए पैसे की पूरी डिटेल, बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर अन्य आरोपियों और साजिश के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यह मामला 1999 से लंबित था, लेकिन अब ईओडब्ल्यू की सक्रियता से अंतिम चरण में पहुंच गया है।

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