उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 21 साल पहले मृत घोषित हो चुकी पत्नी के नाम से मुकदमा दर्ज होने पर पति ने पुलिस में शिकायत की। जांच में खुलासा हुआ कि बच्चों की देखभाल करने वाली एक महिला ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुद को मृत पत्नी बताकर दीवानी कोर्ट में केस दायर किया था। कोर्ट के आदेश पर चिलुआताल थाना पुलिस ने आरोपी महिला पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना परिवारिक रिश्तों में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की गंभीर मिसाल पेश करती है, जिससे पति और परिवार सदमे में है।
पति की शिकायत और पुलिस पहुंच
पति ने जब सुना कि उसकी पत्नी (जो 21 साल पहले मर चुकी है) के नाम से मुकदमा दर्ज है, तो वह परेशान होकर थाने पहुंच गया। उसने बताया कि उसकी पत्नी की मौत 21 साल पहले हो चुकी है, फिर भी किसी ने उसके नाम से कोर्ट में वाद दायर किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी महिला ने शपथपत्र और फर्जी दस्तावेजों के जरिए खुद को मृत पत्नी का रूप दिया और परिवार रजिस्टर में अपना नाम दर्ज करवाया। महिला लंबे समय से परिवार के साथ रह रही थी और बच्चों की देखभाल का जिम्मा संभाल रही थी, लेकिन असल में वह फर्जी पहचान पर टिकी हुई थी। पति की शिकायत पर कोर्ट ने जांच के आदेश दिए, जिसके बाद चिलुआताल पुलिस ने कार्रवाई की।
आरोपी महिला की पहचान और फर्जीवाड़ा
जांच में पता चला कि आरोपी महिला का असली नाम गंगा भारती (पत्नी रामप्रीत) है। उसने फर्जी दस्तावेज तैयार कर खुद को मृत पत्नी बताकर दीवानी न्यायालय में मुकदमा दायर किया था। इसका मकसद संभवतः संपत्ति, परिवारिक अधिकार या अन्य लाभ हासिल करना था। महिला ने परिवार के साथ रहकर विश्वास जीता और बच्चों की देखभाल की, लेकिन पीछे से धोखाधड़ी की। पुलिस का कहना है कि फर्जी शपथपत्र और दस्तावेजों के आधार पर यह केस चला, जिससे पति को कानूनी परेशानी हुई। आरोपी पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और कोर्ट में झूठे हलफनामे के आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
चिलुआताल थाना पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर आरोपी महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। पुलिस फर्जी दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है, साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ की जा रही है। यह मामला संपत्ति विवाद या अन्य निजी लाभ से जुड़ा हो सकता है। पुलिस ने कहा कि जांच पूरी होने पर आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। ऐसे मामलों में आईपीसी की धाराएं 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज), 468 (जालसाजी) और अन्य लगाई जा सकती हैं।









































