उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य) को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। ग्राम पंचायत प्रधानों का 5 साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल मतदाता सूची प्रकाशन की तारीख अब 15 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दी है, जिससे सिर्फ एक महीने में आरक्षण, नामांकन, प्रचार और मतदान जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी करना लगभग असंभव लग रहा है। मुख्य कारण समर्पित पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग का गठन न होना है, जो ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के ‘ट्रिपल टेस्ट’ को पूरा करने के लिए जरूरी है। ऐसे में चुनाव समय पर न होने पर ग्राम पंचायतों में प्रशासक तैनात किए जा सकते हैं, और 6 महीने के अंदर चुनाव कराए जा सकते हैं। फिलहाल मई तक चुनाव होने की संभावना बहुत कम दिख रही है, और कई रिपोर्ट्स में इसे 2027 तक (विधानसभा चुनाव के बाद) टलने की आशंका जताई जा रही है।
प्रधानों का कार्यकाल समाप्ति और समय सीमा की चुनौती
ग्राम पंचायत प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, जबकि ब्लॉक प्रमुखों का 19 जुलाई और जिला पंचायत अध्यक्षों का 11-12 जुलाई तक। संविधान के अनुसार, कार्यकाल समाप्त होने से पहले या अधिकतम 6 महीने के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने फाइनल वोटर लिस्ट पहले 28 मार्च से बढ़ाकर अब *15 अप्रैल* कर दी है। इससे दावे-आपत्तियों का निस्तारण, आरक्षण सूची तैयार करना और अन्य प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं हो पाएंगी। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर समय पर चुनाव का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में अप्रैल-मई में चुनाव की संभावना न के बराबर है। कई जगहों पर जुलाई या उसके बाद चुनाव की चर्चा है।
OBC आयोग गठन और ट्रिपल टेस्ट का पेच
ओबीसी आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट के 2010 के फैसले के अनुसार ‘ट्रिपल टेस्ट’ जरूरी है:
1. पिछड़ेपन का quantitative डेटा (सर्वे)।
2. आरक्षण की जरूरत का आकलन।
3. कुल सीटों में 50% से ज्यादा आरक्षण न हो।
इसके लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (5 सदस्यों वाला, जिसमें अध्यक्ष उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश) का गठन जरूरी है। मौजूदा आयोग का कार्यकाल अक्टूबर 2025 में खत्म हो चुका था, और नया आयोग अभी गठित नहीं हुआ है। इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) में PIL पर सरकार ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि आयोग गठन की प्रक्रिया चल रही है, और चुनाव उसके बाद ही होंगे। आयोग गठन के बाद सर्वे, रिपोर्ट और आरक्षण सूची तैयार करने में महीनों लग सकते हैं। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रक्रिया 6 महीने या ज्यादा ले सकती है, जिससे चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद तक टल सकते हैं।
संभावित परिणाम और राजनीतिक संदर्भ
अगर मई-जुलाई 2026 तक चुनाव नहीं हुए, तो ग्राम पंचायतों में प्रशासक (जिला मजिस्ट्रेट या अन्य अधिकारी) तैनात किए जाएंगे, जो 6 महीने तक काम संभालेंगे। इसके बाद चुनाव अनिवार्य होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि OBC आरक्षण का पेच और समय की कमी सरकार के लिए चुनौती है, लेकिन कुछ इसे रणनीतिक देरी भी मान रहे हैं ताकि पंचायत चुनाव विधानसभा चुनाव के बाद हों। प्रत्याशियों में बेचैनी बढ़ गई है, क्योंकि आरक्षण और तारीखों पर सस्पेंस बरकरार है। राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार जल्द आधिकारिक घोषणा कर सकती है, लेकिन फिलहाल चुनाव टलने की संभावना मजबूत है।
INPUT-ANANYA MISHRA










































