UP: गोरखपुर विश्वविद्यालय में रैंकिंग एवं प्रत्यायन पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

UP: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) और रैंकिंग प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में ‘रैंकिंग एवं प्रत्यायन’ विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विश्वविद्यालय से संबद्ध 350 से अधिक महाविद्यालयों तथा शैक्षणिक हितधारकों को उच्च शिक्षा में गुणवत्ता उन्नयन और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग प्रक्रियाओं के प्रति सजग करना था। विशेष रूप से 70 से अधिक महाविद्यालय वर्ष 2026 की NIRF एवं नैक रैंकिंग में भागीदारी के लिए तैयारी कर रहे हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए यह कार्यक्रम अत्यंत प्रासंगिक माना गया।

संस्थागत उत्कृष्टता में रैंकिंग की बढ़ती भूमिका

कार्यक्रम का शुभारंभ रैंकिंग प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव के स्वागत भाषण और रूपरेखा प्रस्तुतीकरण से हुआ। उन्होंने राष्ट्रीय रैंकिंग ढाँचों की वर्तमान समय में बढ़ती उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये केवल मूल्यांकन का माध्यम नहीं, बल्कि संस्थागत विकास की दिशा तय करने वाले मानक हैं। उन्होंने महाविद्यालयों से आह्वान किया कि वे रैंकिंग को प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि गुणवत्ता सुधार के अवसर के रूप में देखें।

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गुणवत्ता सुदृढ़ीकरण के लिए रणनीतिक सहभागिता आवश्यक

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की प्रतिष्ठा और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने के लिए सतत गुणवत्ता संवर्धन और ठोस रणनीतिक योजना जरूरी है। उन्होंने संबद्ध महाविद्यालयों से अपेक्षा की कि वे रैंकिंग और प्रत्यायन प्रक्रियाओं में सक्रिय एवं गंभीर भागीदारी सुनिश्चित करें। उनके अनुसार, सामूहिक प्रयासों और सुविचारित नीतियों के माध्यम से ही गुणवत्तापरक शिक्षा के मानकों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।

SWOT विश्लेषण और डेटा-आधारित प्रबंधन पर बल

मुख्य अतिथि प्रो. संजीत सिंह, महानिदेशक UPCRAM ने अपने वक्तव्य में महाविद्यालयों को NIRF में आवेदन से पूर्व विस्तृत SWOT विश्लेषण करने की सलाह दी। उन्होंने Teaching & Learning Resources, Graduation Outcomes और Perception जैसे प्रमुख मानकों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। साथ ही सुव्यवस्थित प्रलेखन, सटीक डेटा प्रस्तुतीकरण और निरंतर गुणवत्ता सुधार को बेहतर रैंकिंग के लिए अनिवार्य बताया। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने रैंकिंग मानदंडों और संस्थागत सुधार की प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा की। समापन अवसर पर IQAC निदेशक प्रो. अजय सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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