अमेरिका से कल एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर देखने और सुनने को मिली…अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया… लेकिन फैसले के सिर्फ तीन घंटे के भीतर ही ट्रंप ने दुनिया भर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का नया ऐलान कर दिया। सवाल अब ये है क्या यह संवैधानिक टकराव की शुरुआत है? और इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर कितना होगा?
बता दे शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी मुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को नहीं, बल्कि कांग्रेस को है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 100 से अधिक देशों पर टैरिफ लगाते समय अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया। फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर व्यापक आर्थिक नीतियां लागू करना संवैधानिक सीमाओं से परे है।
बता दे ट्रंप ने साल 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट IEEPA—का सहारा लिया था। यह कानून मूल रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा या आपात स्थितियों में आर्थिक प्रतिबंध लगाने के लिए बनाया गया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि बढ़ता व्यापार घाटा और विदेशी निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसलिए 100 से ज्यादा देशों से आयातित वस्तुओं पर टैरिफ लगाया गया। ट्रंप का दावा था—इससे अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, राजस्व बढ़ेगा और व्यापार वार्ताओं में अमेरिका की स्थिति मजबूत होगी।
लेकिन इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई। एक दर्जन अमेरिकी राज्यों और छोटे व्यवसायों के समूह ने याचिका दायर की। इनमें शैक्षिक खिलौने बनाने वाली कंपनियां, वाइन आयातक और अन्य आयात-निर्भर कारोबारी शामिल थे। उनका कहना था कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस के अधिकारों में अवैध दखल दिया। अदालत में दलील दी गई कि टैरिफ के कारण उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ीं,सप्लाई चेन बाधित हुई,कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी,सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं तर्कों को आधार बनाते हुए राष्ट्रपति के आदेश को रद्द कर दिया।
Also read:प्रयागराज: कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज अहम सुनवाई
इस फैसले के सिर्फ तीन घंटे बाद ट्रंप ने नया बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि वे 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाने के आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। ट्रंप ने अदालत के कुछ जजों की खुलकर आलोचना की और कहा “यह बहुत निराशाजनक है… मुझे कुछ जजों पर शर्म आती है। उनमें देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।”ट्रंप के इस बयान से अमेरिकी राजनीति में एक नई बहस छिड़ गई है
वहीं इस फेसले के बाद ट्रंप ने कहा भारत के साथ व्यापार समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना “अच्छा दोस्त” बताया।लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि 10% ग्लोबल टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर पड़ सकता है—खासकर स्टील, ऑटो पार्ट्स, टेक्सटाइल और फार्मा सेक्टर पर। हालांकि यदि भारत के साथ विशेष द्विपक्षीय समझौता सुरक्षित रहता है, तो असर सीमित भी हो सकता है।
अमेरिका में यह मामला अब सिर्फ व्यापार नीति का नहीं, बल्कि संवैधानिक संतुलन का बन गया है। अब सवाल उठ रहे हैं की क्या राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल का हवाला देकर आर्थिक नीतियां लागू कर सकते हैं? क्या कांग्रेस की भूमिका दरकिनार की जा सकती है? क्या नया 10% टैरिफ भी अदालत में चुनौती झेलेगा? विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह मामला फिर कोर्ट पहुंचा, तो यह अमेरिका के संवैधानिक ढांचे की बड़ी परीक्षा होगी।
ट्रंप के इस फैसले से दुनियाभर के बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। निवेशक अनिश्चितता में हैं। यदि 10% ग्लोबल टैरिफ लागू होता है,तो वैश्विक व्यापार महंगा होगा,सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ेगा,महंगाई दर प्रभावित हो सकती है
अब सबके मन में सवाल ये उठ रहें है की सुप्रीम कोर्ट का फैसला… राष्ट्रपति का पलटवार… और अब पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ। क्या अमेरिका में यह टकराव आने वाले दिनों में और गहराने की संभावना है।क्या ट्रंप का नया आदेश भी कानूनी कसौटी पर टिक पाएगा? और क्या यह कदम वैश्विक व्यापार युद्ध की नई शुरुआत है? फिलहाल—दुनिया की नजरें वॉशिंगटन पर टिकी हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA



