झारखंड में डिजिटल क्रॉप सर्वे की रफ्तार धीमी, 24 जिलों में अब तक सिर्फ 38.80% खेतों का सर्वे पूरा

रांची
 झारखंड में खरीफ 2026 के डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) की रफ्तार धीमी है. राज्य के 24 जिलों में 17 अक्तूबर तक निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले केवल 38.80 प्रतिशत खेतों का ही डिजिटल सर्वे पूरा हो सका है. राज्य में कुल 26,07,544 प्लॉट का सर्वे किया जाना है, जबकि 17 अक्तूबर तक इनमें से 10,11,834 प्लॉट का सर्वे हुआ है. वहीं, सर्वे के बाद अप्रूवल की स्थिति उत्साहजनक नहीं है. अब तक 5,15,628 प्लॉट का ही अप्रूवल हुआ है, जो कुल लक्ष्य का 19.77 प्रतिशत है. जिलावार आंकड़ों के अनुसार, 17 जिलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे का काम 50 प्रतिशत से कम हुआ है. इनमें पश्चिमी सिंहभूम में सबसे खराब स्थिति है. यहां निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले केवल 15.47 प्रतिशत प्लॉट का सर्वे पूरा हुआ है. खूंटी में 14.76 प्रतिशत और दुमका में 21.18 प्रतिशत सर्वे हुआ है. राजधानी रांची में भी 30.29 प्रतिशत प्लॉट का ही सर्वे पूरा हो सका है.

31 अक्टूबर तक पूरा करना है सर्वे
डिजिटल क्रॉप सर्वे की धीमी प्रगति को देखते हुए स्टेट एग्रीकल्चर मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (समेति), झारखंड के निदेशक सह नोडल पदाधिकारी (डीसीएस) रामशंकर प्रसाद सिंह ने सभी जिलों के जिला कृषि पदाधिकारियों को पत्र लिखा है. 15 अक्तूबर को जारी पत्र में खरीफ 2026 के डिजिटल क्रॉप सर्वे की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्तूबर 2026 कर दी गयी है. पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि अब आगे समय-सीमा बढ़ाये जाने की संभावना नहीं है. ऐसे में सभी जिलों को सर्वे और अप्रूवल से संबंधित लंबित काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा. जिला कृषि पदाधिकारियों को सर्वेयर और सुपरवाइजर की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करने तथा प्रतिदिन की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया है. अप्रूवल पर भी देना होगा जोर डिजिटल क्रॉप सर्वे के तहत केवल खेतों का सर्वे करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सर्वे के बाद संबंधित आंकड़ों का अप्रूवल भी जरूरी है. राज्य में अब तक 5,15,628 प्लॉट का अप्रूवल हुआ है. कुल लक्ष्य के मुकाबले यह 19.77 प्रतिशत है. इसलिए जिलों को सर्वे की गति बढ़ाने के साथ अप्रूवल के लंबित मामलों का निबटारा करना होगा. कृषि विभाग के सामने अब 31 अक्तूबर तक शेष सर्वे और अप्रूवल का काम पूरा करने की चुनौती है.

50% से कम डिजिटल क्रॉप सर्वे वाले जिले
क्र. सं.    जिला    कुल लक्ष्य (प्लॉट)    17 अक्टूबर तक सर्वे    लक्ष्य के मुकाबले प्रगति
1    साहिबगंज    6,06,105    2,87,870    47.50%
2    धनबाद    14,57,270    6,78,989    46.59%
3    गढ़वा    9,57,942    4,42,257    46.17%
4    पाकुड़    7,44,383    3,09,439    41.57%
5    चतरा    6,98,375    2,90,049    41.53%
6    बोकारो    8,75,924    3,37,308    38.51%
7    लातेहार    6,85,590    2,35,655    34.37%
8    सरायकेला    9,60,259    3,08,376    32.11%
9    सिमडेगा    10,75,028    3,44,231    32.02%
10    गिरिडीह    16,59,942    5,20,003    31.33%
11    गोड्डा    8,31,300    2,56,736    30.88%
12    रांची    16,99,735    5,14,891    30.29%
13    पूर्वी सिंहभूम    12,72,139    3,75,416    29.51%
14    पलामू    12,51,963    3,17,407    25.35%
15    दुमका    18,53,760    3,92,621    21.18%
16    पश्चिमी सिंहभूम    20,33,968    3,14,683    15.47%
17    खूंटी    9,61,219    1,41,829    14.76%

सर्वेयरों की उपलब्धता के बावजूद कई जिलों में पिछड़ रहा काम
राज्य में सर्वे के लिए कुल 65,478 सर्वेयरों का पंजीकरण हुआ है. इनमें 28,901 सर्वेयर पंजीकृत सर्वेयरों की सूची में दर्ज हैं, जबकि 6,275 सीएससी सर्वेयर भी पंजीकृत हैं. कुल पंजीकृत सर्वेयरों की संख्या 34,303 बतायी गयी है. हालांकि, जिलों में सर्वे की प्रगति में अंतर है. लोहरदगा में 80.29 प्रतिशत, देवघर में 76.82 प्रतिशत और हजारीबाग में 64.93 प्रतिशत सर्वे पूरा हो चुका है. इसके विपरीत कई जिले अभी आधे लक्ष्य तक भी नहीं पहुंचे हैं.