बिलासपुर.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर 22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ आ रहे हैं. वे 22 अक्टूबर की शाम चार बजे गोडवाना एक्सप्रेस से बिलासपुर पहुंचेंगे. बिलासपुर में पहले दिन वे कोनी स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में एक बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे.
इस बौद्धिक वर्ग में केवल बिलासपुर जिले के संघ पदाधिकारी शामिल होंगे. डॉ. भागवत रात्रि विश्राम बिलासपुर में ही करेंगे. दूसरे दिन 23 अक्टूबर को संघ की प्रांतीय टोली की बैठक होगी, जिसमें छत्तीसगढ़ प्रांत के सभी प्रमुख संघ पदाधिकारी शामिल होंगे. बताया गया कि प्रांतीय टोली की बैठक में डॉ. पुर्णेन्दु सक्सेना, स्वपनिल कुलकर्णी, अभयराम, नारायण नामदेव, चंद्रशेखर वर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहेंगे. इस बैठक के बाद संघ प्रमुख देर शाम जबलपुर के लिए रवाना होंगे और वहां विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे.
हर साल प्रांत का दौरा तय –
सर संघ चालक का हर साल एक बार प्रांत का दौरा तय है। उनके इस प्रवास के लिए इस बार रायपुर के बजाय बिलासपुर का चयन किया गया है। इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि विभाग टोली और प्रांत कार्यकारिणी की बैठक में वार्षिक कार्यक्रमों की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान छत्तीसगढ़ प्रांत के पुनर्गठन पर भी फैसला हो सकता है।
प्रांत का दो हिस्सों में विभाजन
संगठन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ प्रांत को दो हिस्सों में बांटने की तैयारी है। एक हिस्से में बिलासपुर व सरगुजा संभाग का पूरा हिस्सा आएगा। दूसरे में रायपुर, दुर्ग व बस्तर संभाग का हिस्सा आएगा। यानी अब एक के बजाय दो प्रांत प्रचारक होंगे। इसे जनवरी से लागू करने की तैयारी है।
संघ की शाखाओं में विस्तार
आरएसएस का लक्ष्य सभी जिलों तक गतिविधियां और शाखाएं शुरू करना है। मैदानी क्षेत्रों में आरएसएस की शाखाओं की संख्या ज्यादा है, लेकिन बस्तर क्षेत्र में संख्या कम थी। इसे बढ़ाने पर रणनीति बनेगी। आरएसएस प्रमुख का जो संभावित कार्यक्रम आया है। उसके मुताबिक वे 22 अक्टूबर को पहुंचेंगे और शाम 7 बजे कोनी में बौद्धिक वर्ग को संबोधित करेंगे। पहले विभाग टोली की बैठक होगी, जिसमें वे अपना वृत्त प्रस्तुत करेंगे। इसमें करीब 150 पदाधिकारी रहेंगे। वहीं सभी आनुषांगिक संगठनों की प्रांत कार्यकारिणी में 100 पदाधिकारी हिस्सा लेंगे।
Gen-Z को जोड़ने की तैयारी
देश में कॉकरोच जनता पार्टी और Gen-Z के आंदोलनों को देखते हुए आरएसएस आने वाले समय में 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत आरएसएस के साथ-साथ अन्य आनुषांगिक संगठनों में इन्हें जोड़ने का लक्ष्य है। आरएसएस के वर्ग की तरह कई गतिविधियों के जरिए लोगों को जोड़ा जाएगा। उनके लिए प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्र निर्माण और एकता आदि के लिए प्रेरित किया जाएगा। बता दें कि आरएसएस का फोकस घर-घर और हर वर्ग तक पहुंचने का है। इसी कड़ी में स्वयंसेवकों ने अभियान के रूप में भारत माता के चित्र और आरएसएस के परिचय के संबंध में प्रपत्र घर-घर तक पहुंचाया है।














