फरीदाबाद.
बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल ने औद्योगिक नगरी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। देर रात तक लोग सड़कों पर उतर गए और जाम लगा दिया। गांवों से लेकर शहर की कालोनियों और ग्रेटर फरीदाबाद की ऊंची-ऊंची सोसायटी तक बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
बिजली आपूर्ति बाधित होने का असर घरेलू उपभोक्ताओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक इकाइयों और कारोबार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि ग्रेटर फरीदाबाद की कई सोसायटी में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए जनरेटर पर निर्भरता बढ़ गई है। दिन हो या रात, जनरेटर चलने से लोगों को शोर और ईंधन की खपत जैसी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है।
निजीकरण के विरोध में जनता पर पड़ रही मार
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का उद्देश्य निजीकरण के विरोध में अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना है, लेकिन इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की दिनचर्या पर दिखाई दे रहा है। बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से घरों में जरूरी कामकाज से लेकर दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की गतिविधियां तक प्रभावित हो रही हैं। बिजली पर निर्भर उपकरणों का संचालन बाधित होने से लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि कर्मचारियों और सरकार के बीच चल रहे विवाद का समाधान कब निकलेगा।
उद्योगों की रफ्तार पर लगा ब्रेक
फरीदाबाद की पहचान देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में होती है। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां बिजली पर निर्भर हैं। बिजली आपूर्ति में व्यवधान आने से उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। मशीनों के संचालन, माल तैयार करने और समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए निर्बाध बिजली जरूरी है। हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित हो गया। आपूर्ति बाधित होने पर उद्योगों को वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ते हैं, जिससे परिचालन खर्च बढ़ सकता है। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो इसका असर उत्पादन, आपूर्ति शृंखला और कारोबार पर और गहरा हो सकता है। उद्योग जगत के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
ग्रेटर फरीदाबाद में जनरेटर के सहारे सोसायटियां
ग्रेटर फरीदाबाद की बहुमंजिला सोसायटियों में बिजली की जरूरत पूरी करने के लिए जनरेटर का इस्तेमाल बढ़ गया है। लिफ्ट, पानी की मोटर, कॉमन एरिया की लाइट और अन्य जरूरी सुविधाओं के संचालन के लिए बैकअप व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है। जनरेटर लगातार चलने से ईंधन की खपत बढ़ती है। इसके साथ ही शोर और धुएं से जुड़ी परेशानी भी निवासियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। बिजली संकट के बीच लोगों को यह भी चिंता सता रही है कि यदि आपूर्ति सामान्य होने में देरी हुई तो वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भरता और बढ़ेगी।
समाधान की राह देख रहे उपभोक्ता
निजीकरण के मुद्दे पर कर्मचारियों और सरकार के बीच जारी खींचतान का खामियाजा आम लोगों को नहीं भुगतना चाहिए। बिजली जैसी बुनियादी सुविधा प्रभावित होने से घरेलू जीवन, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों पर एक साथ असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि बातचीत के माध्यम से विवाद का जल्द समाधान निकाला जाए और बिजली आपूर्ति सामान्य रखने के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शहरवासियों और उद्योगों को राहत तभी मिलेगी, जब बिजली व्यवस्था पटरी पर लौटेगी और हड़ताल के कारण पैदा हुआ संकट समाप्त होगा।














