जालंधर
पंजाब ने पहली बार एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी करते हुए अंतरराष्ट्रीय हॉकी में अपनी मजबूत विरासत को नया आयाम दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि पंजाब वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने के लिए भी तैयारियां कर रहा है।
चैंपियनशिप में भारत समेत छह देशों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। बांग्लादेश, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और मलेशिया की टीमों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब का हॉकी से गहरा नाता है। राज्य ने देश को कई ओलंपियन और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दिए हैं। अब सरकार खेल ढांचे को मजबूत कर नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने पर ध्यान दे रही है।
पंजाब ने दिए 77 हॉकी ओलंपियन
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर 2024 के पेरिस ओलंपिक तक पंजाब ने देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं। इनमें से 48 खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं। उन्होंने बलबीर सिंह सीनियर, ऊधम सिंह, पृथिपाल सिंह, अजीत पाल सिंह, सुरजीत सिंह और परगट सिंह जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के योगदान को याद किया।
उन्होंने कहा कि टोक्यो ओलंपिक-2021 और पेरिस ओलंपिक-2024 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कांस्य पदक जीतने में पंजाब के खिलाड़ियों की अहम भूमिका रही। मौजूदा भारतीय टीम में भी पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं।
हॉकी के बुनियादी ढांचे पर जोर
भगवंत मान ने बताया कि राज्य में छह नए एस्ट्रो-टर्फ हॉकी मैदान स्थापित किए गए हैं, जबकि दो अन्य मैदानों का निर्माण जारी है। इसके अलावा 18 छह-ए-साइड एस्ट्रो-टर्फ मैदान तैयार किए गए हैं। ‘खेडां वतन पंजाब दियां’ के चौथे सीजन के लिए छह लाख से अधिक खिलाड़ियों ने पंजीकरण कराया है। वहीं, मुख्यमंत्री खेल मैदान योजना के तहत राज्य में 3,000 से अधिक खेल मैदान विकसित किए जा रहे हैं।
जालंधर के ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम में ‘हीरो एशियन चैंपियंस ट्रॉफी पंजाब-2026’ का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की पहली बार मेजबानी करना पंजाब के लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह भारतीय हॉकी में पंजाब के असाधारण योगदान के प्रति सम्मान और गौरव का प्रतीक है।
उन्होंने आगे कहा, “पंजाब सरकार राज्य की खेल प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करने और चैंपियनों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए खेल ढांचे को मजबूत कर रही है। जमीनी स्तर पर खेलों में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जा रहा है और खिलाड़ियों को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जा रहा है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पंजाब और हॉकी का अटूट रिश्ता है। भारतीय हॉकी में राज्य का योगदान केवल खिलाड़ियों के रूप में भागीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी विरासत है, जिसका निर्माण जुनून, त्याग, अनुशासन और दृढ़ खेल भावना से हुआ है।”
उन्होंने कहा, “पंजाबी खिलाड़ियों के अमूल्य योगदान के बिना भारतीय हॉकी के इतिहास की कल्पना करना भी मुश्किल है। पंजाब अपनी उपजाऊ धरती, मेहनती किसानों और देश की खाद्य सुरक्षा में योगदान के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।
इसके साथ ही पंजाब की धरती ने ऐसे ओलंपियन, विश्व चैंपियन और खेल नायक भी पैदा किए हैं, जिन्होंने दुनिया भर में तिरंगे का गौरव बढ़ाया है।”
उन्होंने आगे कहा, “हॉकी पंजाब के खून में समाई हुई है और हर पीढ़ी के खिलाड़ियों ने इस विरासत को पूरे गर्व के साथ आगे बढ़ाया है।”
भारतीय हॉकी में पंजाब के शानदार योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब ने वर्ष 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक से लेकर वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक तक देश को 77 हॉकी ओलंपियन दिए हैं, जिनमें से राज्य के 48 खिलाड़ियों ने ओलंपिक पदक जीते हैं। पंजाबी खिलाड़ियों ने 10 अवसरों पर ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी भी की है, जो खेल के क्षेत्र में पंजाब के निरंतर नेतृत्व को दर्शाता है।”
महान हॉकी खिलाड़ियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बलबीर सिंह सीनियर, ऊधम सिंह, पृथिपाल सिंह, अजीत पाल सिंह, सुरजीत सिंह और परगट सिंह के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
उन्होंने कहा, “1952 के हेलसिंकी ओलंपिक के फाइनल में बलबीर सिंह सीनियर द्वारा पांच गोल करने की असाधारण उपलब्धि भारतीय हॉकी के इतिहास का एक अद्वितीय अध्याय है। ऊधम सिंह का चार ओलंपिक खेलना और पदक जीतने का शानदार रिकॉर्ड भी हमारे लिए प्रेरणादायक है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2021 के टोक्यो ओलंपिक और वर्ष 2024 के पेरिस ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम द्वारा कांस्य पदक जीतने से ओलंपिक पदकों के सिलसिले को फिर से मजबूती मिली। उन्होंने कहा कि इससे पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम को लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने का अवसर 52 वर्षों के अंतराल के बाद मिला था।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “दोनों ओलंपिक टीमों में पंजाब की मजबूत भागीदारी भारतीय हॉकी में राज्य के निरंतर महत्त्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली मौजूदा भारतीय हॉकी टीम में पंजाब के आठ खिलाड़ी शामिल हैं।”
उन्होंने कप्तान अजीत पाल सिंह के नेतृत्व में वर्ष 1975 में भारत की पुरुष हॉकी विश्व कप जीत तथा वर्ष 2001 में गगन अजीत सिंह और वर्ष 2016 में हरजीत सिंह की कप्तानी में जूनियर पुरुष हॉकी विश्व कप की जीत में पंजाब के योगदान का भी उल्लेख किया।
भारतीय हॉकी में जालंधर के विशेष योगदान के बारे में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “जालंधर और इसके आसपास के गांवों ने ओलंपियनों तथा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की कई पीढ़ियां तैयार की हैं।
संसारपुर, खुसरोपुर और मिट्ठापुर जैसे गांवों ने हॉकी के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के कारण विश्व स्तर पर अलग पहचान बनाई है। इन गांवों से 20 से अधिक ओलंपियन निकले हैं। इन गांवों में हॉकी केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती आ रही परंपरा है।”
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ओलंपियन सुरजीत सिंह हॉकी स्टेडियम पंजाब के लिए भावनात्मक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखता है।
उन्होंने कहा, “वर्ष 1975 में भारत की ऐतिहासिक हॉकी विश्व कप विजेता टीम के सदस्य रहे सुरजीत सिंह के नाम पर बना यह स्टेडियम पंजाब की हॉकी की दुनिया के त्याग, उपलब्धियों और उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करता है। इस टूर्नामेंट के अवसर पर स्टेडियम में ओलंपियन सुरजीत सिंह की एक प्रतिमा भी स्थापित की गई है।”
उन्होंने कहा कि स्टेडियम में संचालित पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स सेंटर और खेलो इंडिया सेंटर भविष्य के हॉकी सितारों को निखारने में सहायता कर रहे हैं। वर्तमान में पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स सेंटर में 102 हॉकी खिलाड़ी और खेलो इंडिया सेंटर में 33 अन्य खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब खेल ढांचे, जमीनी स्तर पर भागीदारी और विशेष प्रशिक्षण में निवेश कर रहा है, ताकि हमारे युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के अवसर मिल सकें।”
बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी करने की पंजाब की क्षमता पर विश्वास व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब वर्ष 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी करने के लिए तैयार है।














