अयोध्या
अमेरिका के शिकागो में माता-पिता से सुनी अयोध्या की बातें पॉल के लिए इस दीपोत्सव पर साक्षात अनुभव बन गईं। अपनी दोस्त शेल्बे के साथ रामनगरी पहुंचे पॉल ने सरयू आरती में हिस्सा लिया और राम की पैड़ी पर स्थानीय लोगों के साथ दीये जलाए। जिस अयोध्या के बारे में दोनों ने अपने देश में सुना था, उसी नगरी के उत्सव में शामिल होकर उन्होंने यहां की आस्था और परंपरा को करीब से महसूस किया। किसी के लिए माता-पिता की बातें इस यात्रा की प्रेरणा बनीं तो किसी के लिए दोस्तों से मिली जानकारी।
पॉल ने बताया कि उनके माता-पिता अयोध्या के बारे में बताते रहे हैं। उनसे इस नगरी की महत्ता के बारे में बहुत कुछ सुना था। उन्हीं बातों ने अयोध्या को लेकर उनके मन में जिज्ञासा जगाई। यहां आने के बाद उन्हें उस महत्ता को स्वयं देखने और समझने का अवसर मिला। पॉल के अनुसार अब तक जिस अयोध्या को उन्होंने माता-पिता की बातों के माध्यम से जाना था, उसे आज अपनी आंखों से देख लिया।
शेल्बे के अयोध्या पहुंचने के पीछे भी अमेरिका में हुई बातचीत की भूमिका रही। उन्होंने बताया कि उनके दोस्तों ने इस पावन नगरी की बहुत प्रशंसा की थी। अयोध्या के पुराने इतिहास और धार्मिक महत्व के बारे में सुनकर उनकी भी यहां आने की इच्छा हुई। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्त पॉल के साथ अयोध्या आने का निर्णय लिया।
दोनों की इस यात्रा का खास पड़ाव सरयू आरती रही। आरती में शामिल होने के बाद वे राम की पैड़ी पर पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ दीये जलाकर दीपोत्सव मनाया। इस तरह रामनगरी के बारे में सुनने से शुरू हुआ उनका परिचय यहां के उत्सव में भागीदारी तक पहुंच गया। वे स्वयं उस परंपरा का हिस्सा बने, जिसकी चर्चा उन्होंने अमेरिका में सुनी थी।
पॉल और शेल्बे ने बताया कि अमेरिका में उन्हें अयोध्या दीपोत्सव के बारे में भी जानकारी मिली थी। उन्होंने सुना था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत कराने में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की स्मृति से जुड़े इस उत्सव को देखने की उत्सुकता भी उनकी यात्रा से जुड़ी थी।
शेल्बे ने अयोध्या के ऐतिहासिक महत्व का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके लिए दोस्तों से सुनी प्रशंसा यहां आने का कारण बनी, जबकि पॉल के लिए यह यात्रा माता-पिता से मिली जानकारी को अपने अनुभव में बदलने का अवसर रही। अलग-अलग माध्यमों से रामनगरी के बारे में जानने वाले दोनों मित्र दीपोत्सव में एक साथ शामिल हुए। इस दीपोत्सव पर अयोध्या दोनों मित्रों के लिए सुना हुआ एक नाम भर नहीं रही, बल्कि स्वयं जीया हुआ अनुभव बन गई।














