लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (KGMU) में यौन शोषण और धर्मांतरण के आरोपी डॉ. रमीज (Dr. Rameez) उर्फ रमीजुद्दीन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच एजेंसियां आरोपी के अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की पड़ताल में जुटी हैं। इस बीच संस्थान के भीतर विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच समन्वय की कमी को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
एफआईआर न होने से नाराज डॉक्टर-कर्मचारी

KGMU के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव (Aparna Yadav) के समर्थकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज न होने पर कड़ा ऐतराज जताया है। संयुक्त समिति का कहना है कि यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं होती तो वे मंगलवार से हड़ताल पर चले जाएंगे। इस फैसले से अस्पताल की नियमित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
तोड़फोड़ और अभद्रता के आरोप
संयुक्त समिति का आरोप है कि अपर्णा यादव के समर्थकों ने KGMU परिसर में तोड़फोड़ की और महिला कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस संबंध में चौक थाने में तहरीर दी गई थी, लेकिन 72 घंटे बीतने के बाद भी कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। समिति ने चेतावनी दी है कि 13 जनवरी को इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर ओपीडी बंद रखी जाएगी।
हड़ताल की घोषणा, मरीजों पर असर की आशंका
KGMU के शिक्षकों सहित पांच संगठनों ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है। हालांकि पहले से ही ओपीडी बंद करने का दबाव था, लेकिन दूर-दराज से आने वाले मरीजों को ध्यान में रखते हुए 24 घंटे पहले सूचना देने का निर्णय लिया गया। हड़ताल की स्थिति में मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?
9 जनवरी को महिला डॉक्टर से जुड़े यौन शोषण और धर्मांतरण के मामले में आरोपी डॉ. रमीज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर KGMU परिसर में हंगामा हुआ था। इसी दौरान अराजकता फैलाने के आरोपों में घिरीं अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) से मुलाकात कर अपनी बात रखी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल लगातार बनी हुई है।















































