‘काशी को बदनाम करने की साजिश हो रही …’, मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण विवाद पर भड़के सीएम योगी

UP: मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास के दौरान अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति और पुरानी संरचनाओं के ‘तोड़ने’ के आरोपों के बीच 17 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि काशी को बदनाम करने की साजिश हुई, कुछ तत्व विकास में बैरियर बन रहे हैं, इसलिए खुद यहां आना पड़ा। योगी ने जोर दिया कि काशी अविनाशी है, और पिछले 11 सालों में स्वतंत्र भारत में पहली बार उसका सच्चा अध्यात्मिक विकास हो रहा है। विपक्ष पर तंज कसते हुए बोले, 2014 से पहले गंगा जल आचमन तो दूर, स्नान करने लायक भी नहीं था, आज घाट स्वच्छ और आकर्षक हैं।

मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण का वीडियो वायरल

‘वाराणसी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट के तहत 9 जनवरी 2026 से सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार कार्य शुरू हुआ। काम के दौरान जेसीबी से पुरानी सीढ़ियां, चबूतरे और कुछ संरचनाएं हटाई गईं, जिसके वीडियो वायरल हो गए। विपक्ष और कुछ संगठनों ने इसे ‘हिंदू विरासत का विनाश’ बताया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति टूटी है, लोकमताह होल्कर की बहाली वाली संरचनाएं नष्ट की जा रही हैं। मल्लिकार्जुन खड़गे, अजय राय, अखिलेश यादव आदि ने इसे सनातन संस्कृति पर हमला करार दिया और काम रोकने की मांग की।

पुलिस बल तैनात

होल्कर परिवार के खासगी ट्रस्ट (इंदौर) ने भी ‘अनादरपूर्ण’ कार्रवाई की शिकायत की, कहा कि 1791 में अहिल्याबाई द्वारा स्थापित उनकी प्रतिमाएं अब मलबे में हैं, जांच और बहाली की मांग की। हालांकि ट्रस्ट ने पीएम मोदी और योगी की समग्र विजन की सराहना भी की। स्थानीय विरोध प्रदर्शन हुए, पुलिस बल तैनात किया गया।

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योगी आदित्यनाथ पहुंचे वाराणसी 

योगी आदित्यनाथ आज वाराणसी पहुंचे, पहले काल भैरव और काशी विश्वनाथ का दर्शन किया (मणिकर्णिका घाट जाने का कार्यक्रम रद्द रहा), फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया काशी को बदनाम करने की साजिश हुई। कुछ लोग विकास में बैरियर बन रहे हैं, इसलिए मुझे खुद आना पड़ा’ उन्होंने कहा, काशी अविनाशी है, हर भारतीय की श्रद्धा का केंद्र है, लेकिन स्वतंत्र भारत में इसका विकास नहीं हुआ। पिछले 11 सालों में अध्यात्मिक विरासत का संरक्षण हो रहा है, काशी नई ऊंचाई छू रही है और वैश्विक पहचान मिल रही है।

विपक्ष पर हमला

2014 से पहले काशी के हालात क्या थे? गंगा जल आचमन तो दूर, स्नान करने लायक भी नहीं था। घाटों की दुर्गति सब जानते हैं। आज घाट सबको आकर्षित करते हैं, आचमन और स्नान दोनों संभव हैं।

प्रशासन का पक्ष

कोई मंदिर या देव प्रतिमा नहीं टूटी, पुरानी कलाकृतियां सुरक्षित रखी गई हैं, नए घाट में सम्मानपूर्वक स्थापित की जाएंगी।योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि काम संवेदनशील, पारदर्शी और विरासत के सम्मान के साथ हो। संत समाज के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। विपक्ष इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा है, जबकि सरकार ‘दिव्य काशी’ के विजन पर अड़ी हुई है। क्या विरासत संरक्षण और आधुनिक विकास साथ चल पाएंगे? 2027 चुनाव से पहले काशी का यह विवाद गरमाता दिख रहा है।

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