इस्तीफे से निलंबन तक…अफ़सर ‘अलंकार’ की कहानी … Exclusive on Breaking Tube

UGC के नए नियमों, शंकराचार्य विवाद और बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) के इस्तीफे ने हाल ही में काफी हंगामा मचा रखा है। यह मुद्दा शिक्षा, सनातन धर्म और राजनीति के बीच टकराव को उजागर कर रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश में जहां 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। 26 जनवरी 2026, गणतंत्र दिवस के दिन बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं उनके इस्तीफे के तुरंत बाद उन्हें निलंबित कर दिया है। 2019 बैच के PCS अधिकारी रहे अग्निहोत्री का यह कदम प्रशासनिक गलियारों और राजनीति में अचानक चर्चा का विषय बन गया। उनके इस्तीफे की वजहें दो प्रमुख मुद्दों से जुड़ी हैं, एक, उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए हाल ही में जारी UGC के नए नियम, और दूसरी, प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद।

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13 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने ‘Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026’ जारी किए। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक और जातीय भेदभाव को रोकना है, खासकर SC, ST, OBC और अन्य वंचित वर्गों के छात्रों के लिए। नियमों के तहत हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equal Opportunity Centre (EOC), Equity Committee, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीम बनाई जानी अनिवार्य है।  इन संस्थाओं का काम शिकायतों का त्वरित निवारण और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करना है। गैर-अनुपालन की स्थिति में संस्थानों से डिग्री देने की अनुमति वापस ली जा सकती है और मान्यता रद्द की जा सकती है।

 अलंकार अग्निहोत्री ने UGC को बताया ‘काला कानून’

हालांकि, अलंकार अग्निहोत्री और कुछ अन्य जनरल कैटेगरी के लोग इसे ‘काला कानून’ बता रहे हैं। उनका मानना है कि यह नियम विशेष रूप से ब्राह्मण और सवर्ण छात्रों के खिलाफ भेदभाव पैदा करेंगे और उच्च शिक्षा में असमानता बढ़ाएंगे। उन्होंने इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाला कदम बताया और जनरल कैटेगरी के छात्रों के विरोध को अपना आधार बनाया।

शंकराचार्य विवाद पर जताई नाराजगी 

अग्निहोत्री के इस्तीफे का दूसरा बड़ा कारण प्रयागराज के माघ मेले में हुआ विवाद है। बताया गया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों के साथ दुर्व्यवहार हुआ, जिसमें उनके बाल खींचे गए और उन्हें पीटा गया। अलंकार अग्निहोत्री ने इसे सनातन परंपरा और ब्राह्मणों/संतों के अपमान के रूप में देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी सरकार ने इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और ब्राह्मण विरोधी रवैया अपनाया।

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अलंकार अग्निहोत्री, पॉलिटिक्स ज्वाइन करेंगे या मठाधीश बनेंगे?

अपने इस्तीफे के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने स्पष्ट नहीं किया कि वे राजनीति में कदम रखेंगे या धर्म के क्षेत्र में सक्रिय होंगे।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा में चयन बहुत मेहनत और लगन से होता है। लेकिन जब कोई व्यक्ति पीड़ित होकर इस क्षेत्र से बाहर निकलता है, तो उसे गहरी तकलीफ होती है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि यहां विभिन्न सर्वण समाज के लोग मौजूद हैं, साथ ही अन्य जिलों और राज्यों से भी लोग आ रहे हैं। सभी मिलकर आगे कोई निर्णय लेंगे।मतलब चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने साफ कहा कि यह फैसला समाज ही करेगा।

अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी चिट्ठी में कई महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। अलंकार लिखते हैं,अलंकार ने कहा कि ‘ब्राह्मण और उनके समान जाति के जनप्रतिनिधि अब अपने समाज के प्रति जिम्मेदार न रहकर किसी कॉरपोरेट कंपनी के सेवक बनकर रह गए हैं। अब समय आ गया है कि ब्राह्मण और सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए एक वैकल्पिक राजनीतिक व्यवस्था बनाई जाए, जिससे केंद्र और राज्य सरकार में व्याप्त भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। वहीं दूसरी तरफ , शंकराचार्य ने सिटी मजिस्ट्रेट से फोन पर बात की और कहा, ‘पूरा सनातनी समाज आपसे प्रसन्न है। जो पद आपको सरकार ने दिया है, उससे भी बड़ा पद हम धर्म के क्षेत्र में आपको प्रदान करेंगे। अब यह भविष्य ही तय करेगा कि अलंकार अग्निहोत्री राजनीति में प्रवेश करेंगे या मठाधीश बनेंगे।

क्या अरविंद केजरीवाल की तरह अलंकार भी मौके पर चौका मारेंगे?

इतिहास में कई उदाहरण हैं जब आंदोलन से निकलकर नेता राजनीति में उभरे। असम आंदोलन के स्टूडेंट लीडर प्रफुल्ल कुमार महंता ने Asom Gana Parishad पार्टी की स्थापना की और 1985 में असम के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। अन्ना हजारे आंदोलन से अरविंद केजरीवाल ने AAP बनाई और दिल्ली में सरकार बनाई। अलंकार अग्निहोत्री की स्थिति में भी कुछ ऐसा ही माहौल बनता दिखाई दे रहा है। उन्होंने शंकराचार्य विवाद और UGC नियमों के खिलाफ उठे विरोध के मुद्दे पर सटीक समय पर कदम उठाया। इसके परिणामस्वरूप उनकी सामाजिक और राजनीतिक छवि तेजी से बन रही है। वही गौरतलब है की, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का व्यवहार काफी राजनीतिक रहा है। वे बीजेपी सरकार की आलोचना करते हैं और गौ-रक्षा, राम मंदिर, आर्टिकल 370 जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करते हैं। पहले उन्होंने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने या उम्मीदवार उतारने की योजना का ऐलान किया था।

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5 महीने पहले से बड़ा धमाका करने की योजना बना रहे थे अलंकार

कई लोग मान रहे हैं कि यह कोई अचानक निर्णय नहीं था, बल्कि पांच महीने पहले से इसकी योजना बनाई जा रही थी। आंदोलन और विरोध के इस दौर से उभरकर अग्निहोत्री के लिए राजनीति या मठ-मंडली में प्रवेश करना संभव है। हालांकि, इसके अलावा जो भी अफवाहें हैं, उनकी सच्चाई समय और जनता ही तय करेगी। हालांकि की इस बात की पुष्टी ब्रेकिंग ट्यूब नहीं करता है।

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