सहारनपुर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान एक बीएलओ की ड्यूटी पर हार्ट अटैक से मौत हो गई। सिंचाई विभाग में वरिष्ठ सहायक पद पर तैनात दुष्यंत सिंह बेदी (36 वर्ष) एसआईआर की सुनवाई कर रहे थे, तभी उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें हार्ट अटैक आ गया। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। यह घटना 3 फरवरी 2026 को हुई, जिससे प्रशासनिक कर्मचारियों और परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। दुष्यंत सिंह दो मासूम बच्चों के पिता थे, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। परिवार और सहकर्मी एसआईआर के दबाव को मौत की वजह बता रहे हैं, जबकि प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। यूपी में एसआईआर अभियान के दौरान बीएलओ की मौतों का सिलसिला जारी है, जहां कई मामलों में काम के बोझ और मानसिक तनाव का आरोप लगाया जा रहा है।
सहारनपुर के भोजपुर या आसपास के क्षेत्र में रहने वाले दुष्यंत सिंह बेदी सिंचाई विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे। वे बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के रूप में भी ड्यूटी पर थे और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) अभियान के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण में लगे हुए थे। एसआईआर के दौरान बीएलओ को घर-घर जाकर फॉर्म भरवाने, सुनवाई करने, दावे-आपत्तियां दर्ज करने और लक्ष्य पूरा करने का भारी दबाव होता है। दुष्यंत सिंह एसआईआर की सुनवाई कर रहे थे, जब अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया है।
परिवार और सहकर्मियों का आरोप है कि एसआईआर अभियान के दबाव ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ दिया। यूपी में एसआईआर शुरू होने के बाद से कई बीएलओ की मौतें हुई हैं – कुछ हार्ट अटैक से, कुछ सुसाइड से, और कुछ ब्रेन हेमरेज से। सहारनपुर में यह मामला एसआईआर की ‘मौतों की श्रृंखला’ में नया जुड़ गया है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि पिछले कुछ महीनों में यूपी में 20 से ज्यादा बीएलओ की मौतें एसआईआर दबाव से जुड़ी बताई जा रही हैं, हालांकि आधिकारिक आंकड़े अलग हो सकते हैं।
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दुष्यंत सिंह के परिवार में दो छोटे बच्चे हैं, जिनका भविष्य अब अनिश्चित हो गया है। पत्नी और रिश्तेदारों ने बताया कि वे मेहनती और जिम्मेदार कर्मचारी थे, लेकिन लगातार ड्यूटी, देर रात तक काम और ऊपरी दबाव ने उनकी सेहत बिगाड़ दी। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन में शोक का माहौल है। जिला निर्वाचन अधिकारी और एसडीएम ने परिवार से मुलाकात की और सहायता का आश्वासन दिया। विभाग ने कहा कि मौत की जांच होगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एसआईआर अभियान की आलोचना को और तेज कर रही है। विपक्षी दल जैसे सपा और कांग्रेस ने इसे ‘चुनाव आयोग और सरकार की लापरवाही’ बताया है, जहां कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। कई बीएलओ एसोसिएशन ने एसआईआर की समयसीमा बढ़ाने और दबाव कम करने की मांग की है। परिवार ने मुआवजा और बच्चों की शिक्षा के लिए मदद की अपील की है।
सहारनपुर में यह मौत एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों की कार्यभार और स्वास्थ्य पर सवाल खड़े कर रही है। क्या एसआईआर जैसे अभियान में मानवीय पहलू को ध्यान दिया जाएगा? या मौतों का सिलसिला जारी रहेगा? दुष्यंत सिंह जैसे कर्मचारियों की कुर्बानी समाज के लिए सबक है – काम महत्वपूर्ण है, लेकिन जिंदगी इससे ज्यादा। परिवार को गहरा सदमा है, और पूरा जिला शोक में डूबा
INPUT-ANANYA MISHRA












































