चुनाव से पहले ममता सरकार को बड़ा झटका: सुप्रीम कोर्ट ने दलीलें सुनकर सुनाया अहम फैसला

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 तक के डियरनेस अलाउंस (DA) बकाया चुकाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संकट का हवाला देकर कर्मचारियों के हक से इंकार नहीं किया जा सकता। लगभग 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को राहत देते हुए कोर्ट ने आदेश दिया कि 25% बकाया तुरंत और बाकी मार्च 2026 तक चुकाया जाए। विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने इसे ममता बनर्जी की ‘पराजय’ बताया, जबकि TMC सरकार पर वित्तीय बोझ बढ़ने की आशंका है।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि DA कर्मचारियों का वैधानिक हक है, जिसे राज्य सरकार अपनी ही पे रिवीजन रूल्स (2008) के तहत देना बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय संकट का बहाना नहीं बना सकती। बेंच ने पहले के अंतरिम आदेश को दोहराते हुए निर्देश दिया कि बकाया DA का कम से कम 25% मार्च 2026 तक चुकाया जाए। बाकी राशि के लिए एक चार सदस्यीय कमिटी गठित करने का आदेश दिया गया है, जिसमें पूर्व जज इंदु मल्होत्रा, झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान, पूर्व हाईकोर्ट जज गौतम भादुड़ी और CAG शामिल होंगे। कमिटी 6 मार्च 2026 तक रिपोर्ट देगी और पहली किस्त मार्च अंत तक चुकाई जाएगी।

कर्मचारियों को कितना फायदा

यह फैसला लगभग 20 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए बड़ी राहत है। DA बकाया 2008 से 2019 तक का है, जिसे राज्य सरकार लंबे समय से नहीं चुका रही थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि DA कोई विवेकाधीन लाभ नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार है। राज्य सरकार को अब करोड़ों रुपये का भुगतान करना होगा, जिससे राज्य के वित्तीय घाटे पर असर पड़ सकता है। अंतरिम बजट में सरकार ने DA में 4% बढ़ोतरी की घोषणा की है, लेकिन पुराने बकाया का बोझ अलग से है।

Also read:उत्तर प्रदेश में SIR के दावे-आपत्ति के लिए समय सीमा बढ़ी, अब 6 मार्च तक कर सकते हैं आवेदन

विपक्ष का हमला, BJP ने कहा- ममता की हार

विपक्षी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने फैसले को ममता बनर्जी सरकार की ‘पराजय’ करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ट्रिब्यूनल से हाईकोर्ट तक हारने के बाद भी करोड़ों रुपये वकीलों पर खर्च किए, सिर्फ कर्मचारियों को उनका हक देने से बचने के लिए। BJP ने इसे कर्मचारियों की जीत और सरकार की जवाबदेही का प्रमाण बताया। विपक्ष का आरोप है कि TMC ने ‘फिजूल कानूनी लड़ाई’ में जनता का पैसा बर्बाद किया।

राजनीतिक संदर्भ और चुनावी प्रभाव

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। यह फैसला ममता बनर्जी सरकार के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि कर्मचारी वर्ग बड़ा वोट बैंक है। राज्य पहले से ही 8 लाख करोड़ से ज्यादा कर्ज में है, और अब DA बकाया का अतिरिक्त बोझ आएगा। TMC का कहना है कि फैसले का पालन किया जाएगा, लेकिन विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। इससे पहले भी SSC भर्ती घोटाले और अन्य मामलों में सरकार को कोर्ट से झटके लग चुके हैं।

INPUT-ANANYA MISHRA

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)