आप सांसद संजय सिंह ने कहा शंकराचार्य का संगम स्नान रोकना महापाप

प्रयागराज के माघ मेले में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह शुक्रवार को ज्योतिषपीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर पहुंचे। उन्होंने शंकराचार्य से आशीर्वाद लिया और मुलाकात के दौरान उनके साथ हुए विवाद पर खुलकर बात की। संजय सिंह ने शंकराचार्य को प्रणाम किया और उनके स्वास्थ्य तथा धरने की स्थिति पर चिंता जताई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब शंकराचार्य बीते दिनों से ठंड में खुले में धरने पर बैठे हैं और उनकी तबीयत भी बिगड़ चुकी है। संजय सिंह की यह यात्रा राजनीतिक समर्थन के रूप में देखी जा रही है, जहां विपक्षी दल शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार को धार्मिक अपमान बता रहे हैं।

डिग्री वाले बयान पर तीखा हमला

संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में यूपी सरकार और प्रशासन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग आज तक अपनी डिग्री नहीं दिखा पाए, वे शंकराचार्य से शंकराचार्य होने का सबूत मांग रहे हैं। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री विवाद वाली पुरानी बहस से जुड़ी है, जहां AAP और कांग्रेस ने बार-बार डिग्री दिखाने की मांग की थी। संजय सिंह ने कहा कि यह कितना बड़ा अधर्म है कि एक सम्मानित संत से प्रमाण मांगा जा रहा है, जबकि खुद की योग्यता पर सवाल उठते रहे हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक बहस को नई दिशा दे रहा है।

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संगम स्नान रोकने पर घोर पाप का आरोप

संजय सिंह ने मौनी अमावस्या (18 जनवरी) के दिन शंकराचार्य को संगम स्नान से रोकने की घटना को घोर पाप बताया। उन्होंने कहा कि सरकार ने शंकराचार्य को पालकी में संगम पहुंचने से रोका, उनके शिष्यों के साथ मारपीट की और अपमान किया। यह अपराध धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। संजय सिंह ने कहा कि इससे बड़ा अपराध उनसे शंकराचार्य होने का साक्ष्य मांगकर किया गया है। उन्होंने यूपी सरकार पर हिटलरशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि साधु-संतों का सम्मान करने की बजाय उन्हें अपमानित किया जा रहा है।

विवाद की पृष्ठभूमि और राजनीतिक संदर्भ

यह मुलाकात माघ मेले में शंकराचार्य और मेला प्रशासन के बीच चल रहे विवाद के बीच हुई है। प्रशासन ने शंकराचार्य को दो नोटिस जारी किए हैं—एक संगम पहुंचने के दौरान नियम तोड़ने पर और दूसरा ‘शंकराचार्य’ पद के उपयोग पर, क्योंकि ज्योतिष पीठ पर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है। शंकराचार्य ने नोटिस को अपमानजनक बताया और धरना जारी रखा। विपक्षी दल जैसे AAP, कांग्रेस और सपा इसे धार्मिक अपमान बता रहे हैं, जबकि प्रशासन भीड़ प्रबंधन और नियमों का हवाला दे रहा है। संजय सिंह की यह यात्रा AAP की यूपी में हिंदुत्व और धार्मिक मुद्दों पर हमला बोलने की रणनीति का हिस्सा लगती है।

प्रतिक्रियाएं और सोशल मीडिया पर चर्चा

संजय सिंह के बयान पर X (पूर्व Twitter) पर #SanjaySingh #Shankaracharya और #MaghMela ट्रेंड कर रहे हैं। AAP समर्थक इसे सरकार की पोल खोलने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे राजनीतिक स्टंट कह रहे हैं। कई वीडियो और फोटो वायरल हैं जहां संजय सिंह शंकराचार्य के साथ दिख रहे हैं। यह घटना माघ मेले के दौरान राजनीतिक तापमान बढ़ाने वाली है, जहां धार्मिक और राजनीतिक मुद्दे एक साथ जुड़ गए हैं।

INPUT-ANANYA MISHRA

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