गोरखपुर, 05 फरवरी 2026: भारतीय रेलवे वन्यजीवों, खासकर जंगली हाथियों की रेल ट्रैक पर मौतों को रोकने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा ले रही है। पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के इज्जतनगर मंडल में कुल 99.18 रूट किलोमीटर पर एआई इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) लगाया जा रहा है। यह सिस्टम डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (DAS) पर आधारित है, जो हाथियों की चाल के वाइब्रेशन पैटर्न को पहचानकर तुरंत अलर्ट जारी करता है। इससे लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को समय रहते सूचना मिलती है, ट्रेन रोकी जा सकती है और हाथियों की जान बचाई जा सकती है। यह कदम रेलवे और वन विभाग की संयुक्त पहल का हिस्सा है, जो वन्यजीव संरक्षण और रेल सुरक्षा दोनों को मजबूत करेगा।
सिस्टम कैसे काम करता है
एआई इनेबल्ड इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम ऑप्टिकल फाइबर केबल और DAS तकनीक पर आधारित है। ट्रैक के पास लगभग 20 मीटर दूर और जमीन के नीचे 3 फीट गहराई पर फाइबर केबल बिछाई जाती है। जब कोई हाथी या बड़ा जानवर चलता है, तो उसके कदमों से उत्पन्न कंपन (वाइब्रेशन) फाइबर में सिग्नल पैदा करते हैं। सिस्टम में पहले से फीड किए गए हाथियों की चाल के सिग्नेचर (पैटर्न) से मिलान करके यह पुष्टि करता है कि खतरा हाथी का है या नहीं। पुष्टि होने पर तुरंत अलर्ट भेजा जाता है—लोको पायलट को, स्टेशन मास्टर को और कंट्रोल रूम को। यह अलर्ट रीयल-टाइम में आता है, जिससे ट्रेन की स्पीड कम की जा सकती है या रोकी जा सकती है। यह तकनीक पहले से सफलतापूर्वक पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) में 141 किमी पर लागू है और अब NER सहित अन्य जोनों में विस्तार हो रहा है।
इज्जतनगर मंडल में पहले चरण का कवरेज
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में कुल 99.18 रूट किमी पर यह सिस्टम लगाया जाएगा। पहले चरण में 24 रूट किमी पर काम शुरू हो चुका है, जिसमें निम्नलिखित खंड शामिल हैं:
– लालकुआं-गुलरभोज: 15.8 किमी
– छतरपुर-हल्दी रोड: 1.2 किमी
– हल्दी रोड-लालकुआं: 2.7 किमी
– पंतनगर-लालकुआं: 1.2 किमी
– लालकुआं-हल्द्वानी: 3.2 किमी
इसके अलावा काशीपुर-रामनगर और खटीमा-बनबसा खंड पर भी इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया चल रही है। ये क्षेत्र उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के जंगलों से जुड़े हैं, जहां हाथी अक्सर ट्रैक पार करते हैं।
अन्य उपाय और समन्वय
रेलवे और वन विभाग की संयुक्त टीम हाथियों की सुरक्षा के लिए कई अन्य कदम भी उठा रही है:
– स्पीड लिमिट लागू करना
– साइन बोर्ड लगाना
– अंडरपास और ओवरपास बनाना
– बाड़ लगाना
– हनी बी बजर डिवाइस (मधुमक्खी जैसी ध्वनि से डराने वाला)
– थर्मल कैमरे
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इसके अलावा एलिफेंट कॉरिडोर बनाए गए हैं, ताकि प्रतिबंधित क्षेत्रों में वन्यजीवों के साथ कोई दुर्घटना न हो। भारतीय रेलवे पूरे देश में 1158 रूट किमी पर IDS लगा रही है, जिसमें NER का 99.18 किमी हिस्सा भी शामिल है।
महत्व और प्रभाव
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में हर साल दर्जनों हाथी रेल हादसों में मारे जाते हैं, खासकर पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों में। AI तकनीक से पहले से ही NFR में सैकड़ों हाथियों की जान बचाई जा चुकी है। 2025 में अकेले NFR में 160 से अधिक हाथियों को सुरक्षित बचाया गया। यह सिस्टम न केवल वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देगा, बल्कि ट्रेन संचालन की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। रेलवे का लक्ष्य है कि अप्रैल 2026 तक कई जोनों में यह पूरी तरह कार्यान्वित हो जाए।
रेलवे का यह AI आधारित प्रयास एक बड़ा कदम है, जो तकनीक और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ता है। हाथियों जैसे संवेदनशील प्रजातियों की सुरक्षा अब पुरानी तरीकों से नहीं, बल्कि आधुनिक AI से हो रही है। इससे न केवल जंगली जानवरों की मौतें रुकेंगी, बल्कि रेल यात्रा भी सुरक्षित बनेगी। रेलवे और वन विभाग की यह साझेदारी अन्य क्षेत्रों के लिए भी मिसाल बनेगी।
INPUT-ANANYA MISHRA












































