‘बच्चा गोद लेने वाली मां को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा…’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महिलाओं के अधिकार में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। अदालत ने कहा है कि अब गोद लिए गए बच्चे की मां को भी 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलेगी, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो। इस फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चे की उम्र के आधार पर कोई सीमा नहीं होगी, और गोद लेने वाली मां को भी पूरी तरह से छुट्टी का लाभ मिलेगा।

3 महीने की उम्र सीमा हटाई गई

अदालत ने उस नियम को रद्द कर दिया जिसमें केवल 3 महीने से छोटे बच्चों को गोद लेने पर ही मातृत्व अवकाश की अनुमति थी। पहले सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 60 (4) के तहत गोद लेने वाली मां को 12 हफ्ते की छुट्टी तभी मिलती थी जब बच्चा 3 महीने से कम उम्र का हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस उम्र सीमा को भेदभावपूर्ण मानते हुए इसे हटाने का आदेश दिया।

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मैटरनिटी लीव का तर्क: बच्चे की उम्र मायने नहीं रखती

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जैसे जैविक मां को मातृत्व अवकाश मिलता है, वैसे ही गोद लेने वाली मां को भी यह अधिकार होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मातृत्व का अधिकार और बच्चे की देखभाल की आवश्यकता उम्र पर निर्भर नहीं करती। बड़े बच्चे को गोद लेने वाली मां को भी बच्चे के साथ भावनात्मक तालमेल बनाने और उसकी देखभाल के लिए समय की जरूरत होती है।

पितृत्व अवकाश पर भी विचार

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के दौरान पिता की भूमिका पर भी ध्यान आकर्षित किया। अदालत ने केंद्र सरकार से निर्देश दिया है कि पितृत्व अवकाश पर एक ठोस नीति बनाई जाए। कोर्ट ने कहा कि बच्चे के पालन-पोषण में पिता की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है और इसे सामाजिक सुरक्षा लाभ में शामिल किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति पारदीवाला और न्यायमूर्ति महादेवन की बेंच ने जोर देकर कहा कि गोद लेना परिवार बनाने का वैध तरीका है और कानून किसी प्रकार का भेदभाव नहीं कर सकता।

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