UP: उत्तर प्रदेश के कानपुर में रविवार देर रात हुए एक सड़क हादसे ने प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक लग्जरी लेम्बोर्गिनी कार से छह पैदल यात्रियों को टक्कर मारने के मामले में कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा का नाम सामने आया है। हादसे में घायल सभी लोगों का इलाज चल रहा है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
कैसे हुआ हादसा?
यह घटना कानपुर के ग्वालटोली इलाके में रविवार रात हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तेज रफ्तार में आ रही लग्जरी कार ने सड़क किनारे चल रहे छह लोगों को टक्कर मार दी। घटना के बाद सामने आए वीडियो में देखा गया कि आरोपी को उसके साथ मौजूद बाउंसर ने ड्राइविंग सीट से हटाकर बाहर निकाला।
हालांकि, शुरुआती स्तर पर पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ FIR दर्ज की, जिससे सवाल उठने लगे। बाद में मामला तूल पकड़ने और वीडियो सामने आने के बाद सोमवार को शिवम मिश्रा का नाम FIR में जोड़ा गया। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जांच के आधार पर आरोपी की पहचान की गई है और आगे की कार्रवाई जारी है।
वकील का दावा
वहीं अब हाई-प्रोफाइल एक्सीडेंट मामले में नया मोड़ सामने आया है। आरोपी शिवम मिश्रा के वकील मृत्युंजय कुमार ने दावा किया है कि हादसे के समय गाड़ी शिवम मिश्रा नहीं, बल्कि उसका ड्राइवर चला रहा था। इस मामले में एक्सीडेंट की एफआईआर दर्ज है और इसे लेकर मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई होनी है। वकील के अनुसार मामला नॉन-बेलेबल है, लेकिन अदालत में बचाव पक्ष अपनी दलील पेश कर चुका है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवम मिश्रा के गाड़ी चलाने की बात सही नहीं है।
मुख्यमंत्री का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना को गंभीरता से लेते हुए कानपुर पुलिस से पूरी रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और दोषी को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलेगी।
अखिलेश यादव का सरकार पर निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों के मामलों में कार्रवाई में देरी होती है, जबकि आम लोगों के साथ सख्ती बरती जाती है। उन्होंने कहा कि अगर यही घटना किसी सामान्य व्यक्ति से जुड़ी होती तो कार्रवाई तुरंत होती। हालांकि, उन्होंने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
जांच में सामने आईं पुलिस की लापरवाहियां
प्रारंभिक जांच में पुलिस की कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद थाना प्रभारी ने आरोपी की तबीयत खराब होने की बात कही, जबकि वीडियो में वह सामान्य नजर आ रहा था। इसके अलावा, दुर्घटनाग्रस्त कार को थाने लाने के बाद ढंक दिए जाने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर हुआ कि शुरुआती FIR अज्ञात चालक के खिलाफ दर्ज की गई, जबकि मौके पर मौजूद वीडियो में आरोपी की पहचान स्पष्ट बताई जा रही थी। साथ ही, आरोपी को तुरंत हिरासत में न लिए जाने पर भी सवाल उठे। मामले में लापरवाही के आरोप में थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया है, लेकिन जांच में देरी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी अभी तय नहीं हो पाई है।

















































