मंदिरों पर हमले, हत्याओं से फैला खौफ,फिर भी धर्म नहीं छोड़ेंगे हिंदू समुदाय

ढाका/चांदपुर : बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के अगस्त 2024 में गिरने के बाद धार्मिक हिंसा और अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) पर हमलों में भारी वृद्धि हुई है। मार्च 2025 में चांदपुर जिले के पूरनबाजार में एक हिंदू मंदिर के पुजारी अनिक गोस्वामी पर भीड़ ने हमला किया, जिसके आरोप में उन्हें पैगंबर का अपमान करने का इल्जाम लगाया गया। यह घटना बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरवाद और अल्पसंख्यक असुरक्षा का एक उदाहरण है, जबकि 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनावों में जमात-ए-इस्लामी जैसे इस्लामी दल सत्ता की दावेदारी कर रहे हैं।

अनिक गोस्वामी पर हमला

मार्च 2025 में चांदपुर के पूरनबाजार स्थित चैतन्य महाप्रभु मंदिर के बाहर करीब 600 लोगों की भीड़ जमा हुई। भीड़ का मुख्य आरोप था कि पुजारी अनिक गोस्वामी ने पैगंबर का अपमान किया है। कट्टरपंथी संगठनों, खासकर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े सदस्यों ने इस भीड़ को लीड किया। अनिक गोस्वामी मंदिर से भागने में सफल रहे और अब वे छिपकर रह रहे हैं। उनके मुताबिक, हमलावरों का मकसद हिंदुओं को बांग्लादेश छोड़ने पर मजबूर करना था।

अनिक अब भारत में शरण लिए हुए हैं और उन्होंने कहा है कि “अगर मैं वापस गया तो मुझे मार डालेंगे।” मंदिर को भीड़ ने तोड़-फोड़ की और लूटपाट की। यह घटना शेख हसीना के बाद अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की श्रृंखला का हिस्सा है।

शेख हसीना के बाद धार्मिक हिंसा के आंकड़े

अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से अब तक (2025-2026 तक) अल्पसंख्यकों पर 2000 से ज्यादा हिंसा के मामले दर्ज हुए हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल (BHBCUC) के अनुसार:

कम से कम 61 हत्याएं

28 महिलाओं पर यौन हिंसा (रेप और गैंगरेप सहित)
95 पूजा स्थलों पर हमले, तोड़फोड़, लूट और आगजनी

हिंदू, बौद्ध, क्रिश्चियन और आदिवासी समुदाय प्रभावित हुए। कई मामलों में जमात-ए-इस्लामी, तौहिदी जनता ग्रुप (TJP) और हिज्ब उत तहरीर जैसे संगठनों का नाम आया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स (HRW, Amnesty, AP) में भी इन हमलों को राजनीतिक बदले और कट्टरवाद से जोड़ा गया है।

हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि कई हमले राजनीतिक थे, न कि केवल धार्मिक, लेकिन अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं।

Also read:एटा: तेज रफ्तार ऑरा कार पेड़ से टकराई, खाई में गिरी,हादसे में 3 की दर्दनाक मौत, 2 घायल

12 फरवरी 2026 के चुनाव

अवामी लीग: शेख हसीना की पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही। इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है, और हसीना भारत में निर्वासित हैं। पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की है।
मुख्य मुकाबला: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन (11-पार्टी अलायंस) के बीच। जमात-ए-इस्लामी, जो 2010 के दशक में प्रतिबंधित था, अब खुलकर चुनाव लड़ रहा है और अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है (जैसे हिंदू उम्मीदवार उतारना)।
अन्य: स्टूडेंट्स द्वारा बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी शामिल है।

जमात-ए-इस्लामी अल्पसंख्यकों को टारगेट करने वाली नीतियों के लिए जानी जाती है। चुनाव में अल्पसंख्यक वोट बैंक महत्वपूर्ण है, लेकिन हिंसा के डर से कई लोग डर रहे हैं।

अल्पसंख्यकों की चिंता और अंतरराष्ट्रीय नजर

अल्पसंख्यक समुदायों में डर का माहौल है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि चुनाव के दौरान हिंसा बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय संगठन (HRW, Amnesty) ने अंतरिम सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

बांग्लादेश में यह दौर राजनीतिक संक्रमण, कट्टरवाद के उदय और अल्पसंख्यक असुरक्षा का है। 12 फरवरी का चुनाव न केवल सत्ता का फैसला करेगा, बल्कि देश की धार्मिक सहिष्णुता की दिशा भी तय करेगा।

(देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं.)