प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। वह काशी के लिए रवाना हो गए हैं। इससे पहले, उन्होंने बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- आज मन इतना व्यथित है कि हम बिना स्नान किए ही विदा ले रहे हैं।
इस दुख की भरपाई पता नहीं कौन सा नेता आएगा कौन सी पार्टी आएगी जो करेगी। प्रयागराज हमेशा से आस्था और शांति की धरती रही है। श्रद्धा के साथ यहां आया था, लेकिन एक ऐसी घटना हो गई, जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी।
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा
कल मुझे माघ मेला प्रशासन की ओर से एक पत्र और प्रस्ताव भेजा गया। इसमें कहा कि मुझे पूरे सम्मान के साथ पालकी से संगम ले जाकर स्नान कराया जाएगा। मुझ पर फूल बरसाए जाएंगे, लेकिन मैंने प्रस्ताव को ठुकरा दिया। जब दिल में दुख और गुस्सा हो, तो पवित्र पानी भी शांति नहीं दे पाता।
अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला छोड़ने पर क्या पर बोले
1-घटना से गहरा आघात
शंकराचार्य ने कहा कि इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। इससे न्याय और मानवता पर उनका भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने दोषियों को सजा मिले, इसके लिए मौन रखकर प्रार्थना भी की। उनका आरोप है कि उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई और इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है।
2-बिना माफी कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं
अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि प्रशासन के प्रस्ताव में मौनी अमावस्या की घटना पर माफी नहीं मांगी गई। जब तक गलती स्वीकार कर सच्चे मन से माफी नहीं मांगी जाती, तब तक किसी प्रस्ताव को मानने का सवाल ही नहीं है।
3-दिखावटी सम्मान मंजूर नहीं
उन्होंने कहा कि लंबे विरोध के बाद मेला छोड़ने का फैसला किया गया। संतों और साधुओं के साथ हुए अपमान और मारपीट की भरपाई केवल औपचारिक सम्मान से नहीं हो सकती। जीत-हार का फैसला समय और सनातनी समाज करेगा।
4-आंदोलन जारी रहने का संकेत
शंकराचार्य ने कहा कि यह सिर्फ प्रशासन नहीं, बल्कि शासन का मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जरूरत पड़ी तो आगे भी आंदोलन होगा और सनातनी प्रतीकों का अपमान करने वालों के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।
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अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद और इससे जुड़े अहम बात
18 जनवरी को माघ मेले में स्नान के लिए जा रहे अविमुक्तेश्वरानंद की पुलिस ने पालकी रोकी। विरोध पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, शिखा पकड़कर घसीटने का आरोप लगा। इसके बाद शंकराचार्य शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। 11दिनों से शिविर में प्रवेश नहीं किया।
प्रशासन ने दो दिनों में दो नोटिस जारी कर शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा, जिनका अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया। सीएम योगी ने बिना नाम लिए ‘कालनेमि’ कहा, जिससे विवाद और गहरा गया। जवाब में अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी की तुलना कालनेमि और औरंगजेब से कर दी।
शंकराचार्य विवाद पर संत समाज दो हिस्सों में बंट गया, जबकि तीनों शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में थे। शंकराचार्य की मांग थी कि प्रशासन माफी मांगे, तभी वह स्नान करेंगे। शंकराचार्य के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने 26 जनवरी को इस्तीफा दे दिया। 24 घंटे बाद सीएम के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार ने रिजाइन कर दिया।
INPUT-ANANYA MISHRA














































