बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (Dhirendra Shastri) ने बड़ा ऐलान किया है। वे गुरु की आज्ञा से एक महीने के लिए दुनिया के संपर्क से पूरी तरह दूर रहेंगे। इस दौरान वे उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के बर्फीले पहाड़ों में एकांतवास कर गहन साधना करेंगे। मई 2026 में होने वाली इस साधना के दौरान वे मोबाइल, टीवी, इंटरव्यू, कथा, दिव्य दरबार और किसी भी प्रकार के नेटवर्क से कटकर रहेंगे तथा पूरी तरह ईश्वर भक्ति में लीन रहेंगे।
धीरेंद्र शास्त्री का बयान और गुरु आज्ञा
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने खुद बताया कि यह फैसला उनकी गुरु आज्ञा पर आधारित है। उन्होंने कहा, एक महीने के लिए गुरु आज्ञा लगी है इसलिए हम तप के लिए बद्रीनाथ की पहाड़ियों पर जा रहे हैं। सब त्याग कर, मोबाइल, टीवी, इंटरव्यू, कथा, मिलना सब कुछ त्याग कर हम मई में 1 महीने के लिए पूरे 21 दिन की साधना करने बद्रीनाथ की पहाड़ों पर जा रहे हैं। वे इस दौरान किसी के संपर्क में नहीं रहेंगे और दुनिया से पूरी तरह अलग रहकर आध्यात्मिक साधना में डूबे रहेंगे। यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उनके हालिया बयानों से सामने आई है।
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एकांतवास का उद्देश्य और महत्व
बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर नियमित रूप से कथा, दिव्य दरबार और सनातन धर्म के प्रचार में सक्रिय रहते हैं। लेकिन वे समय-समय पर एकांतवास या अज्ञातवास में जाते रहे हैं, जैसे दिसंबर 2025 में 7 दिनों का अज्ञातवास जहां उन्होंने गुरु पर किताब लिखी। इस बार का एक महीने का एकांतवास बद्रीनाथ के पवित्र स्थल पर होने से इसे विशेष माना जा रहा है। धीरेंद्र शास्त्री इसे तपस्या और ईश्वर भक्ति के रूप में देखते हैं, जिससे वे और अधिक ऊर्जा लेकर लौटेंगे। इस दौरान बागेश्वरधाम में दिव्य दरबार या कथा का आयोजन नहीं होगा।
भक्तों और अनुयायियों की प्रतिक्रिया
धीरेंद्र शास्त्री के लाखों अनुयायी इस घोषणा पर भावुक हैं। कई भक्त इसे उनकी आध्यात्मिक गहराई का प्रमाण मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सनातन धर्म के प्रति उनकी समर्पण भावना से जोड़ रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके इस फैसले की सराहना हो रही है और लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी साधना सफल हो। हालांकि, इस दौरान उनके संपर्क में न आने से भक्तों को इंतजार करना पड़ेगा।
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आगे की संभावनाएं और धाम की व्यवस्था
मई में एकांतवास पूरा होने के बाद धीरेंद्र शास्त्री वापस बागेश्वरधाम लौटेंगे और अपनी नियमित गतिविधियां जैसे कथा, दिव्य दरबार और सनातन प्रचार फिर से शुरू करेंगे। इस दौरान धाम की व्यवस्था सहयोगी और ट्रस्ट द्वारा संभाली जाएगी। यह घटना उनके जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।




















































