भगवान शिव के पावन पर्व महाशिवरात्रि को लेकर काशी नगरी एक बार फिर भोलेनाथ के जयकारों से गूंजने को तैयार है। 15 फरवरी को मनाए जाने वाले इस अलौकिक पर्व पर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख काशी विश्वनाथ धाम में भव्य आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की संभावना है।
मंदिर प्रशासन ने पर्व को लेकर मंगला आरती से लेकर चार प्रहर की आरतियों तक का विशेष शेड्यूल जारी कर दिया है। इस बार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 15 फरवरी की सुबह मंगला आरती के साथ बाबा विश्वनाथ मंदिर के कपाट खुलेंगे और दर्शन अगले दिन 16 फरवरी की सुबह 6 बजे तक अनवरत जारी रहेंगे। इस तरह लगभग 26 घंटे से अधिक समय तक श्रद्धालु लगातार बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर काशीपुराधिपति भगवान श्रीकाशी विश्वनाथ रात्रि जागरण करेंगे और भक्तों को 45 घंटे तक निरंतर दर्शन देंगे। इस अवसर पर श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में 15 फरवरी की भोर में 2:15 बजे से मंगला आरती का आयोजन होगा, जो 3:15 बजे तक संपन्न होगी। आरती के बाद गर्भगृह की साफ-सफाई के लिए 15 मिनट का समय लिया जाएगा, जिसके पश्चात प्रातः 3:30 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। महाशिवरात्रि पर्व की तैयारियों में धाम को विद्युत झालरों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जा रहा है, जिससे यह और भी आकर्षक बन जाएगा।
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मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन भक्तों को पूरे दिन और रात बाबा का झांकी दर्शन उपलब्ध रहेगा। यह दर्शन चारों प्रहर की आरती के दौरान भी जारी रहेगा। मध्याह्न भोग आरती प्रातः 11:40 बजे से प्रारंभ होकर 12:20 बजे तक चलेगी।
प्रथम प्रहर की आरती रात्रि 10 बजे से 12:30 बजे तक, द्वितीय प्रहर की आरती रात्रि 1:30 बजे से 2:30 बजे तक, तृतीय प्रहर की आरती प्रातः 3:30 बजे से 4:30 बजे तक और चतुर्थ प्रहर की आरती प्रातः 5:00 बजे से 6:15 बजे तक की जाएगी। इन आरतियों के बीच भी भक्तों को बाबा के दर्शन होते रहेंगे।
परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात्रि बाबा की शयन आरती नहीं होती है और गर्भगृह भी बंद नहीं किया जाता है। 15 फरवरी की भोर से लेकर 16 फरवरी की रात्रि में शयन आरती तक बाबा श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इस बार महाशिवरात्रि पर विशेष रूप से त्र्यंबकेश्वर से हल्दी लाने की व्यवस्था की गई है, जो बाबा को लगाने के लिए उपयोग की जाएगी।
महाशिवरात्रि का पर्व न केवल काशी बल्कि देश के लिए धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, इस दिन भक्तजन अपने मन की इच्छाओं को पूरा करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं। इस प्रकार, महाशिवरात्रि का पर्व काशी विश्वनाथ धाम में भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा, जिससे भक्तों को एक अद्वितीय अनुभव प्राप्त होगा।
भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने इस बार प्रोटोकॉल दर्शन और सुगम दर्शन की व्यवस्था को बंद रखने का निर्णय लिया है। इस संबंध में मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि महाशिवरात्रि जैसे विशेष पर्वों पर हर वर्ष की तरह इस बार भी केवल झांकी दर्शन की ही व्यवस्था रहेगी। श्रद्धालु क्रमबद्ध तरीके से दर्शन कर मंदिर परिसर से बाहर निकलते रहेंगे।
INPUT-ANANYA MISHRA














































