Banda: कभी जिस छत के नीचे बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, आज वहीं सिर्फ मलबा पड़ा है।बारिश ने गरीब परिवारों से उनका आशियाना छीन लिया और अब पेट की आग ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है।हालात ऐसे हैं कि छोटे-छोटे बच्चों के साथ कई परिवार दूसरों के दरवाजे पर रात गुजारने को मजबूर हैं।नरैनी तहसील के ग्राम जरर से करीब 50 ग्रामीण सोमवार को अपनी फरियाद लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे।किसी के मकान की दीवार गिरी है तो किसी की छत बारिश में ढह गई। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।घर में रखा सामान भी सुरक्षित नहीं बचा और अब रहने के लिए अपना कोई ठिकाना नहीं है।
डेढ़ महीने की बारिश ने छीन लिया आशियाना
ग्रामीणों के मुताबिक,पिछले करीब डेढ़ महीने से रुक-रुककर हो रही बारिश से गांव के कच्चे मकानों को भारी नुकसान हुआ है।कई मकान गिरने के बाद परिवारों को मजबूरी में दूसरे लोगों के घरों में शरण लेनी पड़ी।घरेलू सामान भी दूसरे ग्रामीणों के यहां रखना पड़ा है। सबसे ज्यादा चिंता उन परिवारों की है,जिनके साथ छोटे बच्चे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अपना घर ही नहीं बचा तो बच्चों को सुरक्षित रखने की चिंता हर वक्त सताती रहती है।
‘साहब! घर गिर गया, अब बच्चों को कहां रखें?’
कलेक्ट्रेट पहुंचे ग्रामीणों की फरियाद का सार यही था- मकान गिर गया,घर का सामान बर्बाद हो गया,अब रहने और खाने का इंतजाम कैसे करें?ग्रामीण राजाभैया मिश्रा ने अपनी परेशानी अधिकारियों के सामने रखी।जगत यादव और मुन्नी समेत अन्य ग्रामीणों ने भी बारिश से हुए नुकसान और परिवारों की स्थिति बताकर राहत की मांग की। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि उनके मकानों के नुकसान का तत्काल सर्वे कराया जाए।प्रभावित परिवारों को भोजन,आर्थिक सहायता और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए,ताकि बारिश के इस संकट में उन्हें कम से कम सिर छिपाने और परिवार का पेट भरने की चिंता न करनी पड़े।
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