बरेली जिले के भुता थाना क्षेत्र के गंगापुर डभौरा गांव स्थित सहोद्रा देवी मेमोरियल कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल/इंटर कॉलेज में शैक्षणिक धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। स्कूल के प्रधानाचार्य कमलेश कुमार ने केवल 10वीं कक्षा की मान्यता होने के बावजूद छात्राओं को इंटर कक्षा में प्रवेश दिया, फॉर्म भरवाकर मोटी फीस वसूली, लेकिन यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। परिणामस्वरूप कम से कम 9 छात्राओं को एडमिट कार्ड नहीं मिला और वे बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गईं। छात्राओं और अभिभावकों की शिकायत पर भुता पुलिस ने प्रधानाचार्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। यह घटना बुधवार को परीक्षा केंद्र पर छात्राओं के लौटाए जाने के बाद सामने आई।
स्कूल में फर्जी प्रवेश और फीस वसूली का तरीका
स्कूल में केवल 10वीं कक्षा की मान्यता होने के बावजूद प्रधानाचार्य कमलेश कुमार ने छात्राओं को 11वीं और 12वीं में प्रवेश दिया। उन्होंने छात्राओं से बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरवाए और फीस वसूली – हाईस्कूल के लिए 4500 रुपये और इंटर के लिए 7200 रुपये प्रति छात्रा। लेकिन बोर्ड के साथ पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) नहीं कराया गया, जिससे छात्राओं को एडमिट कार्ड नहीं मिला। बुधवार को परीक्षा देने पहुंची छात्राओं को मुख्य द्वार से ही वापस कर दिया गया। इससे छात्राएं और अभिभावक भड़क गए और थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
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पीड़ित छात्राओं और अभिभावकों का आरोप
कक्षा 12 की छात्राएं प्रियंका, नैंसी, नेहा और कक्षा 10 की छात्राएं चांदनी, कुसुम, मोहिनी, खुशी समेत कुल 9 छात्राओं ने बताया कि उन्होंने पूरी फीस जमा की, लेकिन एडमिट कार्ड नहीं मिला। छात्राओं का कहना है कि प्रधानाचार्य ने फीस लेकर पैसे हड़प लिए और छात्राओं का पूरा साल बर्बाद कर दिया। अभिभावकों ने कहा कि शिक्षा के नाम पर धोखाधड़ी की गई और अब बच्चियों का भविष्य खतरे में है। शिकायत पर भुता थाने में IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक विश्वासघात), 120B (षड्यंत्र) और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और जेल भेजना
भुता पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए प्रधानाचार्य कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने स्कूल के रिकॉर्ड, फीस जमा की रसीदें और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई है। पुलिस का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। यदि अन्य लोग भी शामिल पाए गए तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
छात्राओं का भविष्य और आगे की कार्रवाई
इस धोखाधड़ी से छात्राओं का पूरा साल बर्बाद हो गया है। अभिभावकों ने मांग की है कि स्कूल की मान्यता जांच हो और छात्राओं को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत परीक्षा देने का मौका मिले। शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं। यदि स्कूल में अन्य अनियमितताएं पाई गईं तो मान्यता रद्द करने की कार्रवाई हो सकती है। छात्राओं ने न्याय की गुहार लगाई है ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
INPUT-ANANYA MISHRA










































