उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अब अप्रैल-मई 2026 में नहीं होंगे। राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है कि पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव विधानसभा चुनाव के साथ ही कराया जाएगा। यानी अब पंचायत चुनाव 2027 में विधानसभा चुनाव के साथ होंगे। इस फैसले से पंचायत चुनाव पहले होने की सभी संभावनाएं खत्म हो गई हैं। पंचायती राज विभाग और राज्य निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह निर्णय लिया है।
कार्यकाल खत्म होने की स्थिति
वर्तमान ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल मई 2026 में खत्म हो रहा है। पहले माना जा रहा था कि अप्रैल-मई 2026 में पंचायत चुनाव होंगे। लेकिन पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में देरी के कारण चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे। अगर आयोग की रिपोर्ट समय पर नहीं आई तो OBC आरक्षण के बिना चुनाव संभव नहीं था। इसलिए सरकार ने दोनों चुनाव एक साथ कराने का फैसला लिया है।
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पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन क्यों जरूरी
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसलों के अनुसार स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण देने के लिए राज्य स्तर पर पिछड़ा वर्ग आयोग की तथ्यपरक रिपोर्ट अनिवार्य है। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही जाति-आधारित आरक्षण वाली सीटों की सूची तैयार की जाती है। पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल दिसंबर 2025 में खत्म हो चुका है। हाईकोर्ट में सरकार ने वादा किया था कि पंचायत चुनाव से पहले आयोग का गठन किया जाएगा। लेकिन गठन में देरी के कारण आरक्षण प्रक्रिया रुकी हुई है।
विपक्ष का आरोप और सरकार का जवाब
समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जानबूझकर पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन टाल रही है। विपक्ष का कहना है कि इससे OBC आरक्षण प्रभावित हो रहा है और सत्ता पक्ष को फायदा मिल रहा है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि चुनाव समय पर होंगे। सरकार का दावा है कि आयोग का गठन प्रक्रिया में है और जल्द ही सदस्यों की नियुक्ति हो जाएगी।
कानूनी और संवैधानिक स्थिति
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक OBC आरक्षण के लिए आयोग की रिपोर्ट जरूरी है। बिना वैध आरक्षण सूची के चुनाव कराना संभव नहीं होगा। अगर आयोग की रिपोर्ट अप्रैल-मई 2026 तक नहीं आती तो चुनाव टल सकते थे। इसलिए सरकार ने दोनों चुनाव एक साथ कराने का फैसला लिया है ताकि सभी प्रक्रियाएं पूरी हो सकें और संवैधानिक संकट न आए।
लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा का पहलू
अलग-अलग समय पर दो बड़े चुनाव कराने में सुरक्षा बलों, कर्मचारियों और संसाधनों की कमी हो सकती है। एक साथ चुनाव होने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहेगी। राज्य निर्वाचन आयोग भी इस फैसले से सहमत है।
राजनीतिक प्रभाव
यह फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव है। अब 2027 में विधानसभा और पंचायत चुनाव एक साथ होंगे। इससे राजनीतिक पार्टियों की रणनीति भी बदल जाएगी। पंचायत चुनावों में ग्रामीण वोट बैंक का असर विधानसभा चुनावों पर भी पड़ेगा। विपक्ष इसे पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय बता रहा है, जबकि सरकार इसे प्रक्रियागत और व्यावहारिक फैसला करार दे रही है।
INPUT-ANANYA MISHRA













































