वाराणसी के मणिकर्णिका घाट ध्वस्तीकरण का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें चल रहे विकास कार्य के दौरान प्राचीन मूर्तियों के टूटने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। वहीं अब घाट की ऐतिहासिक विरासत पर आंच आने की चिंता जताई जा रही है। मणिकर्णिका घाट का निर्माण 1771 में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था और 1791 में इसका जीर्णोद्धार भी उन्हीं के द्वारा किया गया था।
कांग्रेस का सरकार पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, हमारी काशी में भाजपा सरकार “रिनोवेशन” के नाम पर लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जी (1771) की ऐतिहासिक धरोहर मणिकर्णिका घाट को तोड़ रही है। यह विकास नहीं, काशी की आत्मा और सनातन संस्कृति पर सीधा हमला है।
मणिकर्णिका घाट हो या वाराणसी की दालमंडी—भाजपा… pic.twitter.com/HNNqp8knQE
— Ajay Rai🇮🇳 (@kashikirai) January 14, 2026
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पार्टी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने X पर पोस्ट कर कहा कि भाजपा सरकार ‘रिनोवेशन’ के नाम पर काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने इसे काशी की आत्मा और सनातन संस्कृति पर हमला है। मणिकर्णिका घाट हो या वाराणसी की दालमंडी भाजपा सरकार बनारस की विरासत, पहचान और इतिहास को मिटाने पर आमादा है।
क्या वाराणसी में अहिल्या माता जी की मूर्तियां तोड़ दी गई हैं?
यदि यह सही है तो यह केवल इंदौर ही नहीं पर पूरे देश का अपमान है।
काशी विश्वनाथ जी का मंदिर निर्माण करने वाली शख्सियत की मूर्ति तोड़ना घोर निंदनीय है। मोदी जी @PMOIndia ये आपके चुनाव क्षेत्र में हुआ है। दोषियों के…— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) January 14, 2026
वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि, क्या वाराणसी में अहिल्या माता जी की मूर्तियां तोड़ दी गई हैं? यदि यह सही है तो यह केवल इंदौर ही नहीं पर पूरे देश का अपमान है। काशी विश्वनाथ जी का मंदिर निर्माण करने वाली शख्सियत की मूर्ति तोड़ना घोर निंदनीय है।
प्रशासन की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान घाट की सीढ़ियों के पास स्थित एक दीवार पर बनी कुछ कलाकृतियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन उन्हें नष्ट नहीं किया गया है। जिलाधिकारी के अनुसार, मिली हुई कलाकृतियों को संस्कृति विभाग द्वारा संरक्षित कर दोबारा स्थापित किया जाएगा और घाट पर स्थित सभी प्राचीन मंदिर सुरक्षित रहेंगे।
फर्जी वीडियो फैलाने का आरोप
प्रशासन ने यह भी दावा किया कि कुछ लोग एआई तकनीक का उपयोग कर भ्रामक वीडियो बना रहे हैं, जिससे गलत जानकारी फैल रही है। ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घाट के पुनर्विकास का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, न कि ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाना।
मणिकर्णिका घाट का ऐतिहासिक महत्व
मणिकर्णिका घाट काशी के 84 प्रमुख घाटों में से एक है और देवी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित पांच घाटों में शामिल है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान विष्णु की मणि गिरी थी, जिससे घाट का नाम पड़ा। वर्तमान में महाश्मशान घाट के पुनर्विकास का कार्य जारी है। इस दौरान पुराने पत्थरों को हटाकर गंगा पार भेजा जा रहा है, जिसे लेकर कुछ लोगों ने 300 साल पुरानी संरचनाओं को हटाने का आरोप लगाया, हालांकि प्रशासन ने इन दावों को निराधार बताया है।














































