नई दिल्ली बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने राज्यसभा में एक बेहद चर्चित और विवादास्पद प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मांग की है कि विदेश में नौकरी या कमाई करने वाले भारतीय नागरिकों को हर छह महीने में अपने माता-पिता की सेवा का सर्टिफिकेट (Certificate of Fulfilled Obligation) देना अनिवार्य किया जाए। यदि कोई व्यक्ति यह सर्टिफिकेट नहीं दे पाता है तो उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया जाए। सांसद ने अपने इस संबोधन का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा कि “मां-बाप से हर 6 मास पर CERTIFICATE OF FULFILLED OBLIGATION लेना आवश्यक किया जाये, अन्यथा उनका पासपोर्ट निरस्त कर दिया जाये।”
डॉ. अग्रवाल ने सदन में अपने भाषण में कहा कि विदेश में अच्छी कमाई करने वाले बच्चों का पहला दायित्व है कि वे भारत में रह रहे अपने माता-पिता की देखभाल और सेवा करें। उन्होंने कहा कि आजकल कई बच्चे विदेश जाकर अच्छा पैसा कमा रहे हैं, लेकिन अपने बुजुर्ग माता-पिता को अकेला छोड़ देते हैं। कई मामलों में बुजुर्ग माता-पिता को आर्थिक तंगी, अकेलापन और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सांसद ने इसे सामाजिक और नैतिक संकट करार देते हुए कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदार औलादों के खिलाफ कड़ा कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि विदेश में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों को हर छह महीने में अपने माता-पिता या अभिभावकों से एक प्रमाण-पत्र प्राप्त करना अनिवार्य हो, जिसमें लिखा हो कि उनकी सेवा और देखभाल पूरी हो रही है। यदि कोई व्यक्ति यह प्रमाण-पत्र नहीं दे पाता है तो उसके पासपोर्ट को निलंबित या रद्द किया जाए। सांसद ने यह भी कहा कि यह कदम न केवल बुजुर्गों की सुरक्षा करेगा बल्कि भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूत बनाएगा।
सांसद के इस बयान और प्रस्ताव ने सोशल मीडिया पर तीखी बहस छेड़ दी है। एक वर्ग इसे बुजुर्गों की सेवा और सम्मान के लिए सराहनीय कदम बता रहा है। कई लोगों ने लिखा कि आज के समय में बच्चे विदेश जाकर माता-पिता को भूल जाते हैं, ऐसे में यह नियम बहुत जरूरी है। वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने इसे अव्यवहारिक और व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताया। उनका कहना है कि पासपोर्ट रद्द करना एक बहुत बड़ा कदम है, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। कुछ लोगों ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि “क्या हर 6 महीने में मां-बाप से सर्टिफिकेट लेना होगा कि वे खुश हैं?”
यह प्रस्ताव अभी औपचारिक रूप से कोई कानून नहीं बना है। यह केवल राज्यसभा में एक सांसद द्वारा रखा गया विचार है। हालांकि डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने इसे सोशल मीडिया पर जोर-शोर से प्रचारित किया है और लोगों से समर्थन मांगा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और समाज में और बहस होने की संभावना है।
INPUT-ANANYA MISHRA












































