‘नीला, सफेद और मैरून पासपोर्ट…’, भारतीय पासपोर्ट के रंगों के पीछे छिपा ‘पावर गेम’

भारत में पासपोर्ट केवल विदेश यात्रा का साधन नहीं, बल्कि धारक की आधिकारिक स्थिति और उद्देश्य का भी संकेत है। रंग के आधार पर सरकार अलग-अलग श्रेणियों के नागरिकों और अधिकारियों की पहचान तय करती है, जिससे विदेशों में इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान उनकी भूमिका तुरंत स्पष्ट हो जाती है। देश में मुख्य रूप से तीन प्रकार के पासपोर्ट जारी किए जाते हैं, नीला, सफेद और मैरून।

नीला पासपोर्ट

नीले रंग का पासपोर्ट भारत में सबसे अधिक जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इसे ‘ऑर्डिनरी’ या टाइप-पी (पर्सनल) पासपोर्ट कहा जाता है। यह छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, पर्यटकों और व्यवसायियों सहित सामान्य नागरिकों को दिया जाता है।इसका उपयोग व्यक्तिगत उद्देश्यों जैसे, पर्यटन, शिक्षा, नौकरी या व्यापार के लिए किया जाता है। नीला पासपोर्ट धारकों को किसी विशेष प्रकार का राजनयिक या सरकारी विशेषाधिकार प्राप्त नहीं होता। अधिकांश देशों की यात्रा के लिए उन्हें पहले से वीजा लेना पड़ता है और हवाई अड्डों पर सामान्य कतार में प्रक्रिया पूरी करनी होती है। यह पासपोर्ट 36 या 60 पृष्ठों के विकल्प में उपलब्ध होता है।

सफेद पासपोर्ट

सफेद रंग का पासपोर्ट ‘ऑफिशियल’ या टाइप-एस (सर्विस) श्रेणी में आता है। यह सरकारी अधिकारियों, सिविल सेवकों (जैसे IAS, IPS) और भारतीय सशस्त्र बलों के सदस्यों को आधिकारिक कार्य से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाता है। यह पासपोर्ट दर्शाता है कि धारक विदेश में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहा है। कुछ देशों में ऐसे पासपोर्ट धारकों को औपचारिक प्राथमिकता मिल सकती है, लेकिन इन्हें राजनयिक छूट (डिप्लोमैटिक इम्युनिटी) प्राप्त नहीं होती। यह एक विशिष्ट सरकारी दर्जा तो देता है, पर राजनयिक स्तर तक नहीं पहुंचाता।

मैरून पासपोर्ट

मैरून रंग का पासपोर्ट सबसे विशेष श्रेणी का माना जाता है। इसे ‘डिप्लोमैटिक[ या टाइप-डी पासपोर्ट कहा जाता है। यह भारतीय विदेश सेवा (IFS) के अधिकारियों, सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों, उच्च-स्तरीय सरकारी अधिकारियों और डिप्लोमैटिक कूरियर के साथ-साथ उनके परिजनों को जारी किया जाता है। इस पासपोर्ट के धारकों को कई देशों में वीजा-फ्री प्रवेश या प्राथमिकता वीजा सुविधा मिलती है। साथ ही, वियना कन्वेंशन के तहत उन्हें राजनयिक प्रतिरक्षा (डिप्लोमैटिक इम्युनिटी) का अधिकार भी प्राप्त हो सकता है, जिससे वे कुछ कानूनी कार्रवाइयों से सुरक्षित रहते हैं। हवाई अड्डों पर तेज इमिग्रेशन, विशेष चेक-इन काउंटर और डिप्लोमैटिक लाउंज जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं। वर्ष 2008 से इस श्रेणी में चिप-आधारित ई-पासपोर्ट भी जारी किए जा रहे हैं।

पासपोर्ट का रंग केवल डिज़ाइन का हिस्सा नहीं

स्पष्ट है कि भारतीय पासपोर्ट का रंग केवल डिज़ाइन का हिस्सा नहीं, बल्कि धारक की भूमिका और अधिकारों का प्रतीक है। जहां नीला पासपोर्ट आम नागरिकों की यात्रा स्वतंत्रता का माध्यम है, वहीं सफेद पासपोर्ट सरकारी जिम्मेदारी को दर्शाता है। मैरून पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के आधिकारिक प्रतिनिधित्व और विशेष राजनयिक दर्जे का संकेत देता है।

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