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BUDGET 2026: केंद्रीय बजट 2026 में एमएसएमई, खादी और वस्त्र क्षेत्र को नई रफ्तार

लखनऊ: केंद्रीय बजट 2026–27 में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा और वस्त्र उद्योग के सशक्तिकरण के लिए कई महत्वपूर्ण और दूरदर्शी घोषणाएं की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने और निर्यात को मजबूत करना है।

वस्त्र क्षेत्र के लिए एकीकृत राष्ट्रीय कार्यक्रम

बजट में वस्त्र उद्योग के लिए एक व्यापक और समन्वित राष्ट्रीय कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया है। इसके अंतर्गत राष्ट्रीय फाइबर मिशन, वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम, टेक्स-इको पहल और समर्थ 2.0 जैसी योजनाओं को एक मंच पर लाया जाएगा। इससे पूरे वस्त्र मूल्य श्रृंखला को मजबूती मिलेगी और उद्योग को नई दिशा प्राप्त होगी।

मेगा टेक्सटाइल पार्कों से निवेश को बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना से वस्त्र एवं परिधान उद्योग में निवेश के नए अवसर खुलेंगे। इन पार्कों के माध्यम से आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध होगा, जिससे राज्य में औद्योगिक विकास के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा खादी एवं ग्रामोद्योग

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि यह बजट उद्योग जगत, किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आया है। बजट में खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल’ शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ बुनकरों और कारीगरों को स्थायी आजीविका प्रदान करेगी।

एमएसएमई के लिए वित्तीय सहायता का विस्तार

एमएसएमई क्षेत्र को गति देने के लिए बजट में 10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त आत्मनिर्भर भारत फंड में 2,000 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी निवेश की जाएगी। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को पूंजी की उपलब्धता बढ़ेगी और उनके विस्तार में सहायता मिलेगी।

TReDS प्लेटफॉर्म से कार्यशील पूंजी की समस्या होगी कम

छोटे उद्यमों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम) प्लेटफॉर्म के दायरे को और विस्तृत किया जाएगा। इससे एमएसएमई को कार्यशील पूंजी की समस्या से राहत मिलेगी और व्यापार संचालन सुगम होगा।

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‘कॉरपोरेट मित्र’ और विरासत क्लस्टरों का पुनरुद्धार

बजट में ‘कॉरपोरेट मित्र’ व्यवस्था के माध्यम से एमएसएमई को व्यावसायिक मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने की पहल की गई है। इसके साथ ही देशभर में 200 विरासत औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्विकास का प्रस्ताव है, जिनमें हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े क्लस्टर भी शामिल होंगे। इससे पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान और प्रतिस्पर्धात्मक मजबूती मिलेगी।

निर्यात प्रोत्साहन से वैश्विक बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए बजट में कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें जूते के अपर हिस्सों के शुल्क-मुक्त आयात की सीमा बढ़ाना और चमड़ा एवं वस्त्र परिधान निर्यात की समय-सीमा में विस्तार जैसे प्रावधान शामिल हैं। इन उपायों से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा क्षमता और मजबूत होगी।

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