Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि इस वर्ष 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी। इस दौरान माता दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की उपासना की जाती है। श्रद्धालु इन नौ दिनों में व्रत रखते हुए मां दुर्गा की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि नवरात्रि में माता का आशीर्वाद प्राप्त करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे से शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे समाप्त होगी। इसी दिन घटस्थापना के लिए सबसे शुभ समय सुबह 6:52 बजे से 8:08 बजे तक माना गया है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:22 बजे से 1:11 बजे तक रहेगा।
कलश स्थापना की विधि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। घर की उत्तर-पूर्व दिशा में कलश स्थापना करना सबसे उत्तम माना जाता है। मिट्टी के पात्र में जौ बोकर मिट्टी का कलश रखा जाता है। इसमें जल, गंगाजल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालकर 5 आम या अशोक के पत्ते चारों तरफ सजाए जाते हैं।
नारियल और कलावा का महत्व
कलश के ऊपर जटा वाला नारियल रखा जाता है। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर या कलावा बांधकर कलश पर स्थापित किया जाता है। इसके बाद हाथ में जल लेकर माता दुर्गा का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक इस कलश की पूजा भी नियमित रूप से की जाती है।
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पूजा स्थल की दिशा का महत्व
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा स्थल की दिशा का असर पूजा के परिणाम पर पड़ता है। सही दिशा में मां दुर्गा की चौकी स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। गलत दिशा में स्थापना करने से पूजा का पूरा लाभ नहीं मिलता।
शुभ और अशुभ दिशाएँ
उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को मां दुर्गा की चौकी रखने के लिए सबसे शुभ माना गया है। उत्तर दिशा में भी चौकी लगाना लाभकारी होता है। वहीं, दक्षिण दिशा को यम की दिशा माना जाता है, इसलिए यहां स्थापना करना अशुभ होता है और इससे घर में नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।


















































