‘CM योगी वोटर लिस्ट पर जनता को गुमराह कर रहे…’, अखिलेश यादव का तीखा हमला, बोले- EC BJP का झंडा लगा ले

समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटर लिस्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अखिलेश ने कहा, ‘वोटर लिस्ट पर मुख्यमंत्री गुमराह कर रहे हैं, चुनाव आयोग BJP का झंडा लगा ले अपने दफ्तर पर! उन्होंने दावा किया कि भाजपा के दबाव में वोटर लिस्ट से PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज के करोड़ों नाम काटे जा रहे हैं।

विशेष रूप से नंदलाल (कन्नौज या सुल्तानपुर से जुड़े) और दशरथ (लखनऊ से) के नाम पर 100-100 फॉर्म भरकर फर्जी वोट डालने की साजिश का आरोप लगाया। अखिलेश ने इसे ‘वोट लूट का इक्वेशन’ बताया और कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में धांधली हो रही है, जहां एक तरफ विधानसभा वोटर लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम कम हुए, वहीं पंचायत लिस्ट में 40 लाख बढ़े। यह बयान 3 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस में आया, जिससे यूपी की सियासत गरमा गई है। विपक्ष इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बता रहा है, जबकि BJP ने आरोपों को ‘झूठा प्रचार’ करार दिया।

उत्तर प्रदेश में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम कटने का विवाद चरम पर है। अखिलेश यादव ने लगातार आरोप लगा रहे हैं कि भाजपा सरकार और चुनाव आयोग मिलकर PDA समाज (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के वोट काट रहे हैं ताकि 2027 विधानसभा चुनाव में फायदा हो। अखिलेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जनता को गुमराह कर रहे हैं और चुनाव आयोग पर भाजपा का प्रभाव है ,’चुनाव आयोग BJP का झंडा लगा ले अपने दफ्तर पर!!’

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अखिलेश ने कहा कि नंदलाल (कन्नौज या सुल्तानपुर जिले से जुड़े मामले में) और दशरथ (लखनऊ से) जैसे नामों पर 100-100 फॉर्म भरकर फर्जी वोट डालने की कोशिश की गई। ये नाम फर्जी या डुप्लिकेट वोटर्स के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं। अखिलेश ने दावा किया कि भाजपा के एक पूर्व सांसद ने खुद स्वीकार किया कि एक जिले में हजारों फर्जी वोट कटे हैं, लेकिन PDA वोटर्स को टारगेट किया जा रहा है। सुल्तानपुर में अल्पसंख्यक वोटर्स के नाम कटने पर भी विवाद है, जहां स्थानीय सपा कार्यकर्ताओं ने पर्दाफाश किया कि ग्राम पंचायत कोटिया में 115 मुस्लिम वोटर्स के नाम गायब हैं। कन्नौज (अखिलेश की पारंपरिक सीट) में भी इसी तरह की शिकायतें हैं, जहां फर्जी फॉर्म भरने का आरोप लगा।

एसआईआर विवाद का बैकग्राउंड

  • विधानसभा एसआईआर के बाद यूपी में वोटर्स की संख्या 2.89 करोड़ कम होकर 12.56 करोड़ रह गई।
  •  वहीं पंचायत एसआईआर में ग्रामीण वोटर्स 40 लाख बढ़कर 12.69 करोड़ हो गए।
  • अखिलेश ने पूछा – दोनों SIR एक ही BLOs ने किए, फिर आंकड़े कैसे अलग? कौन सा SIR सही है?
  • उन्होंने इसे ‘एनआरसी जैसी साजिश’ बताया और कहा कि भाजपा PDA वोट काटकर ‘काला कानून’ लाने की तैयारी कर रही है।

अखिलेश ने PDA प्रहरियों को हर बूथ पर जांच करने की अपील की और कहा कि वोटर लिस्ट को आधार से लिंक किया जाए ताकि गड़बड़ियां रुकें। उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की कि फॉर्म-7 (आपत्ति फॉर्म) की धांधली रोकी जाए और पारदर्शिता बरती जाए।

BJP का पलटवार

भाजपा ने अखिलेश के आरोपों को ‘झूठा और भ्रामक’ बताया। प्रवक्ताओं ने कहा कि एसआईआर चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया है, जिसमें फर्जी और डुप्लिकेट नाम हटाए जा रहे हैं। PDA वोटर्स को डराने का आरोप लगाया और कहा कि सपा चुनावी हार से घबराई हुई है। यह विवाद यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव की पूर्वपीठिका तैयार कर रहा है। अखिलेश की रणनीति PDA समाज को एकजुट करना है, जबकि सरकार इसे ‘साफ-सुथरी वोटर लिस्ट’ की प्रक्रिया बता रही है। सुल्तानपुर, कन्नौज और लखनऊ जैसे जिलों में स्थानीय स्तर पर जांच और विरोध बढ़ रहा है। क्या चुनाव आयोग कोई स्पष्टीकरण देगा या विवाद और गहराएगा? PDA वोटर्स की संख्या और वोटर लिस्ट अब यूपी की सियासत का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है।

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