देवरिया में लंबे समय से चर्चा में रही अब्दुल शाह गनी मजार को लेकर प्रशासन ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। देवरिया सदर से भाजपा विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी (BJP MLA Dr. Shalabh Mani Tripathi) द्वारा भूमि की वैधता पर आपत्ति जताए जाने और इसे सरकारी जमीन बताए जाने के बाद जिला प्रशासन ने मजार परिसर को खाली कराया और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की। रविवार को तय समय-सीमा पूरी होने के बाद तीन बुलडोजरों की मदद से मजार परिसर को गिराने का काम शुरू किया गया।
ध्वस्तीकरण से पहले कराया गया परिसर खाली
प्रशासन ने रविवार दोपहर 12 बजे तक मजार परिसर को पूरी तरह खाली कराने के निर्देश दिए थे। मजार से जुड़े लोगों को पहले ही सूचित कर दिया गया था कि समय पर सामान न हटाने की स्थिति में बलपूर्वक कार्रवाई की जाएगी। निर्देशों के बाद मजार से संबंधित लोगों ने ई-रिक्शा और छोटे वाहनों के माध्यम से अपना सामान हटाया।
भारी पुलिस बल की तैनाती
मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र में गहमागहमी और तनावपूर्ण माहौल बना रहा। प्रशासनिक अधिकारी पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए थे।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्रुति शर्मा, सीओ सिटी संजय रेड्डी, नगर पालिका ईओ संजय तिवारी और सदर कोतवाल विनोद सिंह समेत सैकड़ों पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन ने पूरी कार्रवाई को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने का दावा किया है।
मजार से जुड़े लोगों में नाराजगी
मजार से जुड़े मैनुद्दीन अंसारी ने बताया कि शनिवार देर रात करीब 12 बजे प्रशासन की ओर से फोन कर रविवार दोपहर तक सामान हटाने को कहा गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि आदेश न मानने पर जबरन कार्रवाई होगी।
हमारे पास कोई विकल्प नहीं था: मैनुद्दीन अंसारी
मैनुद्दीन अंसारी ने कहा कि वे अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग से आते हैं, इसलिए प्रशासन की बात मानने के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं था। सुबह होते ही उन्होंने स्वयं मजार से जुड़ा सारा सामान हटाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कलेक्टर, एसडीएम और पुलिस अधिकारियों की एक ही राय थी, जिससे वे मजबूर हो गए।
मामला उठाने पर विधायक को मिली धमकियां
इस पूरे प्रकरण को सामने लाने के बाद देवरिया सदर से बीजेपी विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी को सोशल मीडिया पर जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। इससे पहले भी उन्हें Mdseraj813@gmail.com नामक ई-मेल आईडी से एक धमकी भरा संदेश भेजा गया था, जिसमें विधायक के साथ मुख्यमंत्री को भी गोली मारने की बात कही गई थी।
सरकारी भूमि पर मजार होने का आरोप
अब्दुल शाह गनी मजार पर 2026 के शुरुवात में ही उर्स का आयोजन होना था। विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने उर्स आयोजन की अनुमति पर सवाल उठाते हुए प्रमुख सचिव को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर मजार स्थित है, वह राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है और वहां किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका आरोप है कि मजार कमेटी के पास भूमि से जुड़े कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। जिसके बाद यह आयोजन नहीं हुआ।
28 साल पुरानी हत्या जिक्र
विधायक ने दावा किया कि करीब 28 वर्ष पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामनगीना यादव ने भी मजार की वैधता पर सवाल उठाए थे, जिसके कुछ समय बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। इसी कारण लंबे समय तक लोग इस मुद्दे पर बोलने से डरते रहे।
2017 में भी दर्ज हुआ था मुकदमा
डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2017 में इस जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर एक मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें एक लेखपाल समेत चार लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि बाद में यह मामला दबा दिया गया। जिसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद पूरे प्रकरण की दोबारा जांच शुरू हुई थी।















































