देवरिया: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में रेलवे ओवरब्रिज के नीचे स्थित अब्दुल शाह गनी मजार का पुराना भूमि विवाद फिर सुर्खियों में है। हर साल की तरह इस बार भी मजार कमेटी ने दो दिवसीय उर्स (मेले) के आयोजन के लिए सदर कोतवाली में परमिशन की अर्जी दी थी। जैसे ही यह जानकारी बाहर आई, चर्चाएं तेज हो गई।
प्रमुख सचिव को लिखा पत्र
देवरिया सदर से BJP विधायक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर कड़ी आपत्ति जताई। विधायक ने मांग की कि सरकारी भूमि होने और अवैध कब्जे के चलते मजार पर किसी भी तरह का आयोजन न होने दिया जाए। विधायक का कहना है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में सरकारी दर्ज है और मजार कमेटी के पास कोई ठोस दस्तावेज नहीं है।
कोर्ट में लंबित मुकदमा
यह विवाद नया नहीं है। पहले भी विधायक ने मजार के विस्तार और अवैध कब्जे की शिकायत की थी, जिसके बाद मामला SDM कोर्ट में पहुंच गया। मुकदमे में शुरुआती सुनवाइयों के दौरान मजार कमेटी कोई ठोस स्वामित्व प्रमाण नहीं पेश कर पाई। राजस्व रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से यह सरकारी भूमि दिखाई गई है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
विधायक के पत्र को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन हरकत में आया। उर्स आयोजन पर पूरी रोक लगा दी गई और मजार के गेट पर नोटिस चस्पा कर दी गई। अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट में लंबित मामले और सरकारी भूमि होने के कारण कोई धार्मिक आयोजन नहीं हो सकता।
मजार कमेटी का पक्ष
मजार के खजांची ने एक वीडियो संदेश जारी कर लोगों को सूचित किया कि उर्स का आयोजन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। कमेटी ने शांति की अपील की और कहा कि प्रशासन के आदेश का पालन किया जाएगा।
विधायक और खजांची का बयान
विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा और आयोजन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह कानून-व्यवस्था और भूमि अतिक्रमण का मामला है। वहीं, मजार खजांची ने वीडियो में आयोजन स्थगित होने की पुष्टि की और श्रद्धालुओं से घर पर ही इबादत करने की अपील की।
प्रशासन सख्त
यह मामला पहले भी विवादों में रहा है, जब विधायक की शिकायत पर जांच हुई और धमकियों की खबरें आईं। प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि कोर्ट में लंबित मुकदमे का आगे क्या फैसला आता है।
रिपोर्टर- सुनील शर्मा (देवरिया)











































