UP: देवरिया जिले में उत्तर प्रदेश सरकार की ग्राम्य विकास राज्यमंत्री एवं सलेमपुर विधायक विजय लक्ष्मी गौतम पर गंभीर आरोप लगे हैं। लार ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि और स्थानीय भाजपा नेता अमित सिंह (बबलू) ने मंत्री पर उत्पीड़न, दबाव डालने और एक दर्जन से अधिक ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के तबादले कराने का आरोप लगाया है। साथ ही, उन्हें पार्टी विरोधी कार्य करने का भी दोषी ठहराया गया है। ये आरोप सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है।
आरोपों की पृष्ठभूमि और अमित सिंह का बयान
अमित सिंह ने अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर कई BDO का तबादला करवाया है। उन्होंने कहा कि एक दर्जन से ज्यादा BDO ट्रांसफर में उनकी कथित भूमिका रही है, जो क्षेत्रीय विकास कार्यों में बाधा डाल रही है। अमित सिंह ने आरोप लगाया कि मंत्री द्वारा पार्टी कार्यकर्ताओं पर उत्पीड़न और विरोध करने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे भाजपा के स्थानीय संगठन में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने इसे पार्टी विरोधी गतिविधि करार दिया और जांच की मांग की है।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रभाव
ये आरोप ऐसे समय में लगे हैं जब देवरिया जिला पहले से ही विभिन्न विवादों से जूझ रहा है। राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, जो सलेमपुर सीट से विधायक हैं, पर पहले भी जमीन विवाद, सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार और अन्य मामलों में नाम आ चुका है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक राज्यमंत्री या उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं में यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि अमित सिंह खुद पार्टी के सक्रिय नेता हैं। यदि ये आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह प्रशासनिक हस्तक्षेप और पार्टी अनुशासन के मामले में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
लार ब्लॉक और आसपास के क्षेत्रों में ये खबर तेजी से फैल रही है। कई सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो में अमित सिंह के बयान को साझा किया जा रहा है, जिसमें वे मंत्री पर “बड़ा आरोप” लगाते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे आरोपों की जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आए। प्रशासनिक स्तर पर BDO तबादलों के रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
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