अदीस अबाबा
अफ्रीका के दो देश युद्ध के कगार पर हैं। इन देशों में जुबानी जंग चरम पर है। दोनों देशों की सेनाओं ने भी सीमा पर डेरा डाल दिया है। भारी हथियारों की तैनाती की गई है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि इन दोनों देशों में कभी भी युद्ध शुरू हो सकता है। आशंका यह भी जताई जा रही है कि अगर यह युद्ध शुरू होता है तो इसमें कई दूसरे देश भी शामिल हो सकते हैं, जिससे इसका असर पूरे अफ्रीका पर पड़ने की आशंका है। युद्ध के कगार पर पहुंचे इन दोनों देशों का नाम इथियोपिया और इरिट्रिया है।
इथियोपिया और इरिट्रिया ने संयुक्त राष्ट्र में एक-दूसरे पर आक्रामकता के आरोप लगाए हैं। ये दोनों देश हॉर्न ऑफ अफ्रीका में स्थित हैं, जो पहले से ही संघर्ष से जूझ रहा है। यह राजनयिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब इथियोपियाई सेना और सहयोगी सशस्त्र समूह टिग्रे में तिग्रे पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट (TPLF) के साथ युद्ध लड़ रहे हैं। TPLF को पड़ोसी देश इरिट्रिया का समर्थन हासिल है। TPLF की सहायता के लिए इरिट्रिया की सेना ने सीमा पार कर इथियोपिया में प्रवेश किया है।
इथियोपिया और इरिट्रिया पड़ोसी देश
इथियोपिया और इरिट्रिया पड़ोसी देश हैं। 1991 तक इरिट्रिया, इथियोपिया का ही एक हिस्सा हुआ करता था। लंबे संघर्ष के बाद 1993 में जनमत संग्रह के जरिए इरिट्रिया एक स्वतंत्र देश बना। इसके चलते इथियोपिया अपनी समुद्री सीमा यानी लाल सागर तक सीधी पहुंच खो बैठा और एक 'स्थल-अवरुद्ध' (चारों ओर से जमीन से घिरा देश) देश बन गया। 1998 से 2000 के बीच 'बाडमे' सीमावर्ती क्षेत्र को लेकर दोनों देशों के बीच खूनी युद्ध हुआ, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबे अहमद ने पद संभालने के बाद इरिट्रिया के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते की पहल की, जिसके लिए उन्हें 2019 में नोबेल शांति पुरस्कार भी मिला। अब एक बार फिर दोनों देशों में तनाव बढ़ गया है।
इथियोपिया ने इरिट्रिया पर क्या आरोप लगाया
इथियोपिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि इरिट्रियाई सेना तिग्रे में 60 किलोमीटर तक आगे बढ़ गई थी। उसने इरिट्रिया पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। एक पत्र में, इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन तिमोथियोस ने कथित घुसपैठ को "आक्रामकता का एक स्पष्ट कृत्य" बताया, जो आत्मरक्षा के इथियोपिया के अंतर्निहित अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला दिया, जो किसी देश के आत्मरक्षा के अधिकार को मान्यता देता है, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इथियोपिया क्या कदम उठाएगा।
इरिट्रिया ने जवाब में क्या कहा?
इरिट्रिया ने इथियोपिया में घुसपैठ के आरोपों को खारिज करते हुए इसे हमला करने का बहाना बताया है। शनिवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखे अपने पत्र में, इरिट्रिया के विदेश मंत्री उस्मान सालेह ने परिषद से इथियोपिया की "युद्ध की निंदनीय घोषणा" की निंदा करने और "निवारक उपाय" करने का आग्रह किया। उन्होंने चेतावनी दी कि इथियोपियाई आक्रमण से "दोनों देशों के लोगों को भारी तबाही होगी और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल जाएगी।" चारों ओर से भू-भाग से घिरे इथियोपिया ने बार-बार यह तर्क दिया है कि सीधे समुद्री मार्ग तक पहुंच सुरक्षित करना आवश्यक है, जबकि इरिट्रिया को डर है कि अदीस अबाबा उसके अस्साब बंदरगाह पर कब्जा करने का इरादा रखता है।














