बॉलीवुड में फिल्मों के टाइटल अक्सर विवादों का कारण बनते रहे हैं। हाल ही में मनोज बाजपेयी की नेटफ्लिक्स फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ (या घूसखोर पंडत) के नाम पर ब्राह्मण समाज ने आपत्ति जताई है। इसे जातिगत अपमान बताते हुए विरोध प्रदर्शन, FIR, लीगल नोटिस और यहां तक कि बैन की मांगें उठी हैं। फिल्म में ‘पंडित’ शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ने पर ब्राह्मण संगठनों का गुस्सा है, और मामला कोर्ट तक पहुंच चुका है। लेकिन यह कोई नई बात नहीं—पिछले सालों में कई बड़ी फिल्मों के नाम पर ऐसे ही घमासान मचा, जहां धार्मिक भावनाओं, इतिहास या समाज की छवि को लेकर विरोध हुआ। दीपिका पादुकोण की पद्मावत से लेकर अक्षय कुमार की लक्ष्मी तक कई मामलों में टाइटल बदलने पड़े। आइए जानते हैं ऐसे प्रमुख विवादित टाइटल्स की कहानी।
पद्मावत (2018) – दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर
संजय लीला भंसाली की यह महाकाव्य फिल्म सबसे बड़े विवादों में से एक रही। मूल नाम ‘पद्मावती’ था, लेकिन राजपूत संगठनों (जैसे श्री राजपूत करणी सेना) ने आरोप लगाया कि फिल्म इतिहास से छेड़छाड़ कर रही है और रानी पद्मिनी की छवि खराब कर रही है। विरोध इतना बढ़ा कि सेट पर तोड़फोड़ हुई, दीपिका को नाक काटने की धमकी मिली, और देशभर में प्रदर्शन हुए। CBFC ने फिल्म को U/A सर्टिफिकेट दिया और नाम बदलकर ‘पद्मावत’ कर दिया (अंत में ‘i’ हटाकर)। फिल्म रिलीज से पहले कई राज्यों में बैन की मांग हुई, लेकिन आखिरकार 25 जनवरी 2018 को रिलीज हुई।
लक्ष्मी (2020) – अक्षय कुमार, कियारा आडवाणी
अक्षय कुमार की यह हॉरर-कॉमेडी मूल रूप से ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ नाम से घोषित हुई थी। हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई कि देवी लक्ष्मी के नाम के साथ ‘बॉम्ब’ जोड़ना अपमानजनक है और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। विरोध के बाद मेकर्स ने नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ (Laxmii) कर दिया। फिल्म ट्रांसजेंडर कैरेक्टर पर भी विवाद में रही, लेकिन टाइटल चेंज मुख्य मुद्दा था। यह डिज्नी+ हॉटस्टार पर रिलीज हुई।
गोलियों की रासलीला राम-लीला (2013) – दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह
संजय लीला भंसाली की इस रोमांटिक ड्रामा का मूल नाम ‘रामलीला’ था। कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई कि राम-लीला का नाम इस्तेमाल कर धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ किया जा रहा है। विरोध के बाद नाम बदलकर ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’कर दिया गया। फिल्म सफल रही, लेकिन टाइटल चेंज का विवाद चर्चा में रहा।
Also Read: Film Haq: ‘3 तलाक का संघर्ष, 33 साल बाद न्याय…’, शाह बानो की कहानी अब बड़े पर्दे पर!
मेंटल है क्या (2019) – कंगना रनौत, राजकुमार राव
फिल्म का मूल नाम ‘मेंटल है क्या’ था, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े संगठनों (जैसे इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी) और दीपिका पादुकोण की लाइव लव लाफ फाउंडेशन ने आपत्ति जताई कि यह मेंटल हेल्थ को नेगेटिव तरीके से दिखाता है। विरोध के बाद नाम बदलकर ‘जजमेंटल है क्या’ कर दिया गया।
‘घूसखोर पंडित’ विवाद
‘घूसखोर पंडित’ का विवाद दिखाता है कि बॉलीवुड में टाइटल सिर्फ नाम नहीं, बल्कि भावनाओं का मुद्दा बन जाता है। धार्मिक, जातिगत या सामाजिक संवेदनशीलता पर आपत्ति उठने से फिल्में टाइटल बदलने, रिलीज डिले या कानूनी लड़ाई का सामना करती हैं। मेकर्स को अब CBFC और समाज की भावनाओं का ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। क्या ‘घूसखोर पंडित’ का नाम भी बदलेगा? यह देखना बाकी है, लेकिन इतिहास गवाह है—विवादित टाइटल अक्सर बदलाव की ओर ले जाते हैं।








































