‘सब जानबूझकर सत्ता के इशारे पर हो रहा …’, संस्कृत परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल पर बोले अखिलेश यादव

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों की 7वीं कक्षा की संस्कृत परीक्षा के एक प्रश्न ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल था, ‘बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है परंतु पंडित नहीं है।’ इस सवाल के कारण समाज के एक विशेष वर्ग में नाराजगी फैल गई है। इससे पहले भी यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द को लेकर विवाद हुआ था।

अखिलेश यादव का एक्स पोस्ट

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा,उप्र में फिर हुआ एक ‘समाज विशेष’ का अपमान। इससे साबित हो गया है कि ये सब जानबूझकर सत्ता के इशारे पर हो रहा है। असली सवाल, केवल प्रश्न पर नहीं बल्कि इस बात पर भी उठना चाहिए कि क्या प्रश्नपत्र बनानेवाले लोगों में भी सत्ता सजातीय लोगों को डाल दिया गया है। अगर जानबूझकर टारगेट किये गये ‘पीड़ित’ समाज का कोई भी व्यक्ति उस कमेटी में होता तो क्या ऐसा विकल्प बनाया जाता।

कल को ऐसा प्रश्नपत्र बन सकता है :

विशिष्ट प्रश्न

1. ‘हाता नहीं भाता’ कहावत है या मुहावरा, अर्थ सहित समझाइए।

2. एक समाज विशेष की बैठकों पर नोटिस किसने दिया?⁠

3. ⁠कुंभ मेले में शंकराचार्य जी के स्नान की सनातनी परंपरा किसने तुड़वाई?

4. ⁠एक नव विवाहित को निरपराध किसने जेल में रखा।

5. ⁠एक ग़रीब माँ-बेटी की झोपड़ी में आग लगवाने और उसमें ज़िंदा जल जाने की घटना किसके शासन काल में हुई?

6. ⁠एक समाज विशेष के सम्मानित व्यक्ति की मूरत किसने नहीं लगने देने के लिए चबूतरा तोड़क कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई?

7. ⁠बाराबंकी में किसने, किसकी पिटाई करवाई और उसका निहित उद्देश्य व मूल संदेश क्या और किसको था?

अनुषांगिक प्रश्न

8. हमारे देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कौन लोग देशद्रोही या खलनायक की भूमिगत भूमिका में थे?’

9. ‘वनस्पतिवादी’ किसको कहा जाता है?

10. ⁠’मुक़दमा वापसी’ को उदाहरण सहित समझाइए।

शिक्षकों और संघ की नाराजगी

इस मामले को लेकर शिक्षक संघ ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। संघ ने कार्रवाई की मांग की है और कहा कि इस तरह के सवाल छात्रों में असंवेदनशीलता और विवाद पैदा करते हैं। परिषदीय स्कूल, जो यूपी बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा नियंत्रित और वित्तपोषित होते हैं, में इस प्रकार के प्रश्नों की जगह छात्रों के ज्ञान और समझ पर ध्यान देना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना क्या है? 

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद पिछले जातिगत विकल्पों वाले प्रश्नों की तरह ही एक संवेदनशील मामला है। इससे पहले पुलिस भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ शब्द के गलत प्रयोग को लेकर विरोध हुआ था। ऐसे मामलों में न केवल छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है, बल्कि समाज में भी तनाव पैदा होता है।

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