UP: लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा। समाजवादी पार्टी प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। चुनावी नतीजों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि कुर्मी समाज का एक बड़ा हिस्सा बीजेपी से दूर हो गया है। इसी पृष्ठभूमि में बीजेपी अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गई है।
अयोध्या में अचानक बढ़ी विनय कटियार की सक्रियता

बीते कुछ हफ्तों से बीजेपी के वरिष्ठ नेता और फैजाबाद से पूर्व सांसद विनय कटियार राजनीतिक हलकों में फिर चर्चा का केंद्र बन गए हैं। अयोध्या के रामकोट इलाके में स्थित उनके आवास ‘हिंदू धाम’ में लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। इन बैठकों में बीजेपी कार्यकर्ता, पुराने समर्थक और संघ परिवार से जुड़े वे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जिन्होंने 1990 के दशक में राम जन्मभूमि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
राम मंदिर आंदोलन का बड़ा चेहरा

71 वर्षीय विनय कटियार बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष रह चुके हैं और अयोध्या आंदोलन के सबसे आक्रामक नेताओं में उनकी गिनती होती थी। उन्होंने तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा में बीजेपी का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि, पिछले कई वर्षों से वे सक्रिय राजनीति से लगभग गायब थे।
पंकज चौधरी की विनय कटियार से मुलाकात

राजनीतिक गतिविधियों में यह तेजी तब देखने को मिली जब नए नियुक्त उत्तर प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 22 दिसंबर को कार्यभार संभालने के कुछ ही दिनों बाद लखनऊ में विनय कटियार से मुलाकात की। यह मुलाकात करीब दो घंटे तक चली और पूरी तरह बंद कमरे में हुई। दोनों नेता कुर्मी समाज से आते हैं।
कटियार ने मुलाकात को बताया शिष्टाचार भेंट

हालांकि कटियार ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह बैठक निष्क्रिय पड़े कुर्मी नेताओं को दोबारा सक्रिय करने की रणनीति का हिस्सा थी। सूत्रों के मुताबिक, कटियार को फिर से मैदान में उतरने का संकेत इसी बैठक में मिला।
पुराने संबंधों की नई राजनीतिक अहमियत

1990 और 2000 के दशक की शुरुआत में पंकज चौधरी को विनय कटियार का करीबी माना जाता था। उस दौर में कटियार उत्तर प्रदेश बीजेपी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल थे। अब एक बार फिर दोनों नेताओं का साथ आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
बैठकों का सिलसिला तेज

कटियार पिछले कुछ वर्षों से अधिकतर लखनऊ में रहते थे, लेकिन उनके करीबी बताते हैं कि बीते दो हफ्तों से उन्होंने पूरी तरह अयोध्या में डेरा जमा लिया है। हाल ही में राज्यसभा सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी भी स्थानीय नेताओं के साथ उनसे मिलने पहुंचे।
2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान

इन बैठकों के बाद विनय कटियार ने स्थानीय मीडिया से कहा कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव अयोध्या सीट से लड़ेंगे। बाद में हमारे चैनल ब्रेकिंगट्यूब से बातचीत में भी उन्होंने इस बात की पुष्टि की। यह उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा।दिलचस्प बात यह है कि अयोध्या सीट से वर्तमान में बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता विधायक हैं, जो 2017 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
घर पर बुलाई बैठक

कटियार पिछले 7-8 वर्षों से बजरंग दल, वीएचपी और पार्टी कार्यकर्ताओं से दूरी बनाए हुए थे। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट और निर्माण स्थल के आसपास भी जाना लगभग बंद कर दिया था। हालांकि, हालात अब बदलते दिख रहे हैं। अपनी उम्मीदवारी की घोषणा से ठीक पहले कटियार ने खुद अपने पुराने समर्थकों को संदेश भेजकर बैठक के लिए बुलाया और चाय-नाश्ते पर सक्रिय राजनीति में वापसी की बात कही।
पांच बार सांसद, लेकिन विवाद में भी रहे

विनय कटियार 1991, 1996 और 1999 में फैजाबाद से लोकसभा सांसद रहे। 2006 में रायबरेली उपचुनाव में उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद वे दो बार राज्यसभा सांसद बने।सितंबर 2023 में उनके एक बयान ने विवाद खड़ा कर दिया था, जिसमें उन्होंने अयोध्या में मस्जिद न बनने देने और मुसलमानों को शहर छोड़ने की बात कही थी। इस पर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
PDA राजनीति की काट बन सकते हैं कटियार

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विनय कटियार बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से उपयोगी साबित हो सकते हैं। वे एक फायरब्रांड नेता होने के साथ-साथ कुर्मी समाज का बड़ा चेहरा हैं। ऐसे में वे समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति की काट बन सकते हैं। अवध और उससे सटे पूर्वांचल क्षेत्र में कुर्मी आबादी अच्छी-खासी है, जहां 2022 और 2024 दोनों चुनावों में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा। कटियार की सक्रियता इस क्षेत्र में पार्टी को दोबारा मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।














































