एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी के रूप में मशहूर फर्रुखाबाद की सातनपुर मंडी में इन दिनों सन्नाटा और मायूसी छाई हुई है। इस साल आलू की बंपर आवक तो आई है, लेकिन किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। मंडी में आलू के भाव 450 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर चुके हैं, जो किसानों की कुल लागत से भी काफी कम है। भारी आवक के बावजूद खरीदारों की सुस्ती और बाजार में मांग की कमी ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
भारी आवक, लेकिन खरीदारों की कमी
मंडी के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन लगभग 100 से 120 मोटर (ट्रक और लोडर) आलू सातनपुर मंडी पहुंच रहा है। फर्रुखाबाद में उत्पादित आलू न केवल उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में, बल्कि अन्य राज्यों और विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। फिर भी इस साल बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन साफ दिख रहा है। खरीदारों की कमी और स्टॉक की अधिकता के कारण भाव लगातार गिरते जा रहे हैं।
खेती की लागत और घाटे का गणित
किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि आलू की खेती अब घाटे का सौदा साबित हो रही है। स्थानीय किसानों के अनुसार एक बीघा आलू की खेती का अनुमानित खर्च इस प्रकार है:
कुल लागत लगभग 10,000 रुपये प्रति बीघा।
खुदाई का अतिरिक्त खर्च 3,000 रुपये।
औसत उत्पादन 40 से 45 पैकेट प्रति बीघा।
वर्तमान दर 450 से 600 रुपये प्रति क्विंटल।
इस भाव पर फसल बेचने के बाद किसानों के पास बीज, खाद और मजदूरी तक के पैसे नहीं बच रहे हैं। कई किसानों ने कहा कि इस साल तो लागत भी नहीं निकलेगी।
पीड़ित किसानों की व्यथा
कुसमरा गांव से आए किसान विमल ने बताया कि उन्होंने 7 बीघा में आलू की फसल लगाई थी, लेकिन उनका आलू महज 450-500 रुपये प्रति क्विंटल बिका। नौली गांव के अमित कुमार यादव का आलू 471 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बिका। दोनों ही किसानों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस कीमत में लागत निकालना भी मुमकिन नहीं है। आर्थिक तंगी और गिरते दामों ने उन हजारों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं, जो साल भर इस फसल के भरोसे रहते हैं।
किसानों की मांग और सरकार से अपील
किसानों ने सरकार से मांग की है कि तत्काल आलू के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा की जाए या बाजार में हस्तक्षेप कर भाव बढ़ाने के लिए खरीद शुरू की जाए। कई किसानों ने कहा कि अगर भाव ऐसे ही रहे तो अगले साल आलू की खेती करना मुश्किल हो जाएगा। मंडी में सन्नाटा पसरा होने से छोटे व्यापारी भी परेशान हैं।
मंडी में स्थिति
सातनपुर मंडी में आलू की आवक भारी है, लेकिन खरीदारों की कमी के कारण भाव नहीं बढ़ रहे। व्यापारी और आढ़ती कह रहे हैं कि मांग कम होने और स्टॉक की अधिकता के कारण भाव गिर रहे हैं। कई किसान अपनी फसल मंडी में लाकर भी वापस ले जा रहे हैं क्योंकि भाव लागत से नीचे हैं।
INPUT-ANANYA MISHRA








































