‘तेज दर्द, उल्टी, चक्कर, घबराहट…’, फर्रुखाबाद में एल्बेंडाजोल दवा खाते ही 20 से ज्यादा बच्चों की हालत बिगड़ी, स्कूल में अफरा-तफरी

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के कमालगंज ब्लॉक से एक चिंताजनक घटना सामने आई है। एक सरकारी विद्यालय में ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस’ या नियमित स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों को पेट के कीड़े मारने वाली दवा एल्बेंडाजोल (Albendazole) खिलाई गई। दवा का सेवन करने के कुछ ही मिनटों बाद 20 से अधिक बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों में पेट में तेज दर्द, उल्टी, चक्कर, घबराहट और बेचैनी जैसी शिकायतें सामने आईं, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

घटना का विवरण

मंगलवार दोपहर कमालगंज क्षेत्र के एक प्राथमिक/जूनियर हाईस्कूल में स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देश पर बच्चों को एल्बेंडाजोल टैबलेट दी गई। यह दवा आमतौर पर पेट के कीड़ों (इंटेस्टाइनल हेल्मिन्थ्स) को खत्म करने के लिए दी जाती है और सरकारी अभियानों में लाखों बच्चों को खिलाई जाती है। दवा लेने के 15-30 मिनट के भीतर ही कई बच्चे अस्वस्थ महसूस करने लगे। शुरुआत में कुछ बच्चों ने उल्टी की, फिर पेट दर्द और चक्कर आने लगे। देखते ही देखते यह संख्या बढ़कर 20 से अधिक हो गई।

स्कूल शिक्षकों और स्टाफ ने तुरंत बच्चों को स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया। CHC में प्राथमिक उपचार के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकांश बच्चों को जिला अस्पताल (लोहिया अस्पताल) रेफर कर दिया गया। वर्तमान में करीब एक दर्जन से ज्यादा बच्चे लोहिया अस्पताल में भर्ती हैं, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।

अभिभावकों में आक्रोश और भय

घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल और अस्पताल पहुंच गए। कई माताओं-पिताओं ने रोते हुए बताया कि उनके बच्चे अचानक बेहोश हो गए या बार-बार उल्टी कर रहे हैं। परिजनों ने स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि दवा खाली पेट दी गई या दवा की गुणवत्ता पर सवाल है। कुछ अभिभावकों ने कहा कि अगर दवा के साइड इफेक्ट्स हैं तो पहले सूचना क्यों नहीं दी गई।

चिकित्सकीय पक्ष

डॉक्टरों के अनुसार, एल्बेंडाजोल दवा सामान्य रूप से सुरक्षित होती है, लेकिन कुछ बच्चों में साइड इफेक्ट्स जैसे पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और एलर्जिक रिएक्शन देखे जा सकते हैं, खासकर अगर दवा खाली पेट ली जाए या बच्चे की कोई पूर्व संवेदनशीलता हो। फिलहाल अधिकांश बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। डॉक्टरों ने कहा कि यह बड़े पैमाने पर दवा के कारण सामूहिक प्रतिक्रिया (mass reaction) का मामला हो सकता है।

प्रशासनिक प्रतिक्रिया

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मामले की संज्ञान लिया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने बताया कि दवा का सैंपल जब्त कर लिया गया है और जांच के लिए लखनऊ की लैब में भेजा जा रहा है। शिक्षा विभाग और बेसिक शिक्षा अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि क्या दवा की बैच में कोई समस्या थी, डोज गलत दी गई थी या बच्चों को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी।

सरकारी अभियान पर सवाल

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत पूरे देश में करोड़ों बच्चों को एल्बेंडाजोल दी जाती है। उत्तर प्रदेश में भी यह अभियान बड़े पैमाने पर चलता है। लेकिन इस तरह की घटनाएं दवा वितरण, प्रशिक्षण और निगरानी की कमी पर सवाल खड़े करती हैं। अभिभावक अब मांग कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी दवाएं देने से पहले अभिभावकों से सहमति ली जाए और बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति का पूर्व परीक्षण किया जाए।यह घटना एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों में बच्चों की सुरक्षा और दवा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठा रही है। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।