UP: राजधानी लखनऊ (Lucknow) के आशियाना क्षेत्र में एक परिवार के भीतर हुई गंभीर घटना ने सभी को चौंका दिया। सेक्टर-L निवासी पैथोलॉजी लैब संचालक मानवेंद्र सिंह (Manvendra Singh) कई दिनों तक नजर नहीं आए। तीन दिन बाद उनके बेटे अक्षत सिंह (Akshat Singh) ने थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पूछताछ के दौरान बेटे के हाव-भाव संदिग्ध लगे, जिसके बाद सख्ती से पूछने पर उसने पूरी सच्चाई स्वीकार कर ली। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच जारी है और कुछ साक्ष्य अभी बरामद किए जाने बाकी हैं।
पढ़ाई को लेकर था पारिवारिक विवाद
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पिता अपने बेटे को मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) पास कर एमबीबीएस की पढ़ाई कराने के पक्ष में थे, जबकि बेटा इस बात से सहमत नहीं था। वह अलग व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखता था। इसी मुद्दे को लेकर 20 फरवरी को दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
घटना के बाद रची गई गुमराह करने की योजना
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी ने परिवार और पड़ोसियों को बताया कि उसके पिता दिल्ली गए हैं। तीन दिन बाद उसने स्वयं थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। जब पुलिस ने मोबाइल फोन और अन्य तथ्यों की जांच की तो कहानी में विरोधाभास सामने आए। पूछताछ के दौरान पहले आत्महत्या की बात कही गई, लेकिन बाद में हत्या की बात कबूल कर ली गई।
घर से बरामद हुए अहम सुराग
जांच के दौरान पुलिस टीम आरोपी को घर लेकर पहुंची, जहां से महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। घर के एक कमरे से शव के हिस्से मिले, जबकि कुछ अंग अभी तक नहीं मिले हैं। पुलिस आरोपी की निशानदेही पर अन्य स्थानों पर भी तलाश कर रही है। लाइसेंसी राइफल को भी बरामद कर लिया गया है, जिसे कथित तौर पर छिपाकर रखा गया था।
चार महीने पहले चोरी हुए थे गहने
पुलिस जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। करीब चार महीने पहले मानवेंद्र सिंह के घर से कीमती आभूषण गायब हो गए थे। उस समय मानवेंद्र ने घर में काम करने वाली महिला पर संदेह जताते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। लांकि जांच आगे बढ़ने पर स्पष्ट हुआ कि नौकरानी का इस मामले से कोई संबंध नहीं था। बाद में यह बात सामने आई कि गहनों के गायब होने के पीछे परिवार के भीतर की ही बात थी।सूत्रों के मुताबिक, बेटे अक्षत की संलिप्तता सामने आने के बाद पिता ने उसकी करतूत छिपाने के लिए थाने में दी गई शिकायत वापस ले ली थी। इस खुलासे ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है और जांच एजेंसियां अब हर पहलू को ध्यान में रखकर पड़ताल कर रही हैं।
पड़ोसियों का खुलासा
पुलिस की पूछताछ के दौरान पड़ोसियों ने बताया कि अक्षत को अक्सर अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक के साथ देखा जाता था। वह कई बार घर के भीतर ही हथियार लेकर घूमता था और कभी-कभी कार में रखकर बाहर भी निकल जाता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, वह नियमित रूप से बंदूक की सफाई करता और निशाना साधने की अभ्यास जैसी गतिविधियां करता दिखाई देता था। हालांकि किसी ने उसे हथियार चलाते हुए नहीं देखा, लेकिन उसके व्यवहार से लगता था कि वह बंदूक के इस्तेमाल में काफी सहज था।पड़ोसियों का यह भी कहना है कि वह बंदूक के हिस्सों को खोलकर उनकी सफाई करता और दोबारा जोड़ता था। कभी-कभी वह मोहल्ले में भी हथियार के साथ दिखावा करता नजर आता था। इसी कारण आसपास के बच्चे उससे दूरी बनाए रखते थे।
परिवार की पृष्ठभूमि
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे और कई वर्षों से लखनऊ में रह रहे थे। उनकी पत्नी का निधन नौ साल पहले हो चुका था। वह अपने बेटे अक्षत और बेटी कृति के साथ रहते थे। अक्षत बीकॉम का छात्र है, जबकि कृति 11वीं कक्षा में पढ़ती है। परिवार का सामाजिक दायरा अच्छा माना जाता था और पड़ोसियों के अनुसार मानवेंद्र मिलनसार स्वभाव के थे।
पुलिस जांच
स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिता-पुत्र के बीच पहले भी पढ़ाई और भविष्य को लेकर मतभेद होते रहे थे, लेकिन किसी को अंदेशा नहीं था कि मामला इतना गंभीर रूप ले लेगा। 19 फरवरी के बाद से मानवेंद्र को किसी ने नहीं देखा था। अब पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है और शेष साक्ष्यों की तलाश जारी है। इलाके में इस घटना को लेकर गहरा दुख और आश्चर्य का माहौल है।












































