उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को दो महीने बाद जेल से रिहा कर दिया गया है। देर रात अचानक उनकी रिहाई हुई और वह जेल से बाहर निकलते ही अकेले ही कहीं चले गए। न तो उनके परिवार को पहले से जानकारी थी और न ही उनके समर्थकों या मीडिया को उनकी रिहाई की पूर्व सूचना मिली। रिहाई के बाद अमिताभ ठाकुर का ठिकाना किसी को नहीं पता चल सका है। यह घटना एक बार फिर उनकी कानूनी लड़ाई और राजनीतिक-सामाजिक सक्रियता के बीच के विवाद को उजागर करती है।
रिहाई का समय और तरीका
अमिताभ ठाकुर को लखनऊ जेल से देर रात अचानक रिहा किया गया। जेल प्रशासन ने उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं दी और न ही उनके परिवार या वकीलों को पहले से अवगत कराया गया। रिहाई के बाद अमिताभ ठाकुर जेल के मुख्य द्वार से अकेले बाहर निकले। उन्होंने न तो किसी से बात की और न ही कोई बयान दिया। जेल के बाहर मीडिया और उनके कुछ समर्थक मौजूद थे, लेकिन अमिताभ ने किसी से बात नहीं की और तेजी से वहां से चले गए।
उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि उन्हें भी रिहाई की सूचना देर रात मिली और अब अमिताभ से संपर्क नहीं हो पा रहा है।
रिहाई से पहले की पृष्ठभूमि
अमिताभ ठाकुर पिछले दो महीने से जेल में बंद थे। उन पर विभिन्न धाराओं में मुकदमे दर्ज थे, जिनमें मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों से जुड़े मामले शामिल थे। उनके खिलाफ आरोप लगाए गए थे कि उन्होंने सरकार और प्रशासन के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए और सोशल मीडिया पर विवादास्पद सामग्री पोस्ट की।
अमिताभ के वकीलों ने कई बार जमानत के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। आखिरकार हाईकोर्ट या संबंधित अदालत ने उनकी जमानत मंजूर कर ली, जिसके बाद देर रात रिहाई हुई। हालांकि रिहाई की आधिकारिक वजह या जमानत की शर्तों की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।
परिवार और समर्थकों में भ्रम
अमिताभ ठाकुर के परिवार ने बताया कि उन्हें रिहाई की खुशखबरी मिली तो वे जेल के बाहर पहुंचे, लेकिन तब तक अमिताभ वहां से जा चुके थे। परिवार का कहना है कि अमिताभ ने किसी से बात नहीं की और न ही घर आने का कोई संकेत दिया।उनके समर्थकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भी भ्रम है। कई लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि अमिताभ ठाकुर को सुरक्षा कारणों से अचानक कहीं और ले जाया गया होगा या वे खुद छिपकर रहना चाहते हैं।
Also read:सपा का विधान परिषद से वॉकआउट, कानून-व्यवस्था पर तीखी बहस, सदन में हंगामा
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
अमिताभ ठाकुर की रिहाई और उसके बाद गायब होने की खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
उनके समर्थक इसे सरकार की रणनीति बता रहे हैं और पूछ रहे हैं कि रिहाई के बाद ठिकाना क्यों नहीं बताया गया।
विपक्षी नेता इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दे रहे हैं।
कुछ लोग इसे अमिताभ की अपनी रणनीति मान रहे हैं, ताकि वे आगे की कानूनी लड़ाई या सामाजिक कार्यों के लिए खुद को सुरक्षित रख सकें।
पुलिस और जेल प्रशासन का रुख
जेल प्रशासन ने कहा है कि अदालत के आदेश पर अमिताभ ठाकुर को रिहा किया गया और रिहाई के बाद उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। पुलिस का कहना है कि अमिताभ ठाकुर पर कोई रोक या निगरानी नहीं है, इसलिए वे कहीं भी जा सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने उनके ठिकाने की खोजबीन नहीं की है।
INPUT-ANANYA MISHRA











































