भारत बदल गया है आज भारत हथियारों का केवल खरीददार नहीं बल्कि देसी वैज्ञानिकों द्वारा डेवलप किए गए हथियारों का निर्यातक भी बन गया है. ये निर्यात अब केवल तीसरी दुनिया के देशों तक ही सीमित नहीं है. बल्कि अब डेवलप देश भी भारत के हथियारों के मुरीद हो रहे हैं. इसी क्रम में फ्रांस भी भारत के एक साख सिस्टम को खरीदना चाहता है. इसके लिए उसकी एक हाई पावर कमेटी भारत का दौरा भी कर चुकी है.एक्सपर्ट कह रहे हैं कि राफेल डील के बाद फ्रांस भी चाहता है कि वह भारत के साथ सैन्य रिश्तों को नई ऊंचाई पर पहुंचाए।
इसके लिए वह उस भारतीय हथियार को खरीदना चाहता है, जो हर एक मामले में दुनिया का एक बेहतरीन सिस्टम है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं पिनाका रॉकेट सिस्टम की. यह भारत का एक बेहतरीन रॉकेट सिस्टम है, जो अपनी श्रेणी में दुनिया के किसी भी सिस्टम को कड़ी टक्कर देता है. इस सिस्टम का सीधा मुकाबला अमेरिकी रॉकेट सिस्टम हिमर्स (HIMARS) और रूसी टोर्नाडो-एस (Tornado-S) से है. रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस और भारत के बीच पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए उच्च स्तरीय लेवल पर बातचीत चल रही है. पिनाका एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आज मुंबई में मुलाकात होगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपए की डिफेंस डील होगी। यह डील कीमत के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी सैन्य खरीद होगी। इसके तहत भारत को 114 राफेल फाइटर जेट मिलेंगे।आज होने वाली बैठक में रक्षा, समुद्री सहयोग, इंडो-पैसिफिक रणनीति, उभरती तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी।यह बैठक दोपहर 3:15 बजे मुबंई के लोक भवन में होगी।दोनों नेता शाम 5:15 बजे वे भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर 2026 का उद्घाटन करेंगे। साथ ही दोनों देशों के उद्योगपतियों, स्टार्टअप फाउंडर्स, रिसर्च एक्सपर्ट्स और इनोवेशन से जुड़े लोगों को संबोधित करेंगे।
राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे।
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भारत फ्रांस के बीच राफेल डील की सबसे खास बात ये है कि इनमें से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे। इन एडवांस्ड जेट को F-5 वर्जन कहा जा रहा है, जिन्हें फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन बना रही है।
अभी इंडियन एयरफोर्स के पास जो राफेल हैं, वे F-3 वेरिएंट हैं और 4.5 जेनरेशन फाइटर माने जाते हैं। इनमें स्टेल्थ फीचर्स और न्यूक्लियर वेपन कैरी करने की क्षमता भी है। नई डील में मिलने वाले ज्यादातर जेट F-4 वर्जन के होंगे, जो ज्यादा एडवांस सिस्टम और अपग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे। बताया जा रहा है कि यूरोपियन स्टैंडर्ड के हिसाब से F-5 राफेल को और ज्यादा एडवांस कैटेगरी में रखा जा रहा है। ये अभी डेवलपमेंट फेज में हैं।
प्लान के मुताबिक F-4 जेट की डिलीवरी 2028–29 से शुरू होगी, जबकि 2030 के बाद मिलने वाले जेट F-5 यानी सुपर राफेल होंगे। इस डील के बाद फ्रांस के अलावा भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास इतनी एडवांस कैपेबिलिटी वाले राफेल फाइटर जेट होंगे। इससे एयरफोर्स की स्ट्रेंथ और टेक्नोलॉजी लेवल दोनों में बड़ा बूस्ट माना जा रहा है।
फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन से होने वाली इस डील में की अहम बात यह है कि 114 में से 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। सिर्फ 18 जेट उड़ान के लिए तैयार हालत (फ्लाई-अवे कंडीशन) में सीधे फ्रांस से मिलेंगे। बाकी विमानों का प्रोडक्शन भारत में होगा और उनमें करीब 60% तक स्वदेशी पार्ट्स इस्तेमाल किए जाएंगे।
INPUT-ANANYA MISHRA









































