उत्तर प्रदेश विधानसभा में नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े AI रोबोट के मामले ने तूल पकड़ा। सपा विधायकों ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। विधायकों का कहना था कि यूनिवर्सिटी में AI रोबोट के जरिए छात्रों के साथ होने वाली बातचीत और अन्य गतिविधियों पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने इसे शिक्षा प्रणाली और छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया। सपा विधायकों ने स्पीकर से अपील की कि इस पर विशेष चर्चा की जाए ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
स्पीकर सतीश महाना का साफ इनकार
विधानसभा स्पीकर सतीश महाना ने सपा की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा AI रोबोट का प्रोग्राम न तो यूपी सरकार ने शुरू किया है और न ही यह यूपी में हो रहा है। इसलिए इसकी विधानसभा में चर्चा नहीं होगी। स्पीकर ने कहा कि सदन का समय सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा के लिए है, और यह मामला राज्य सरकार के दायरे से बाहर है। उन्होंने विधायकों से अपील की कि वे सदन के नियमों और समय का सम्मान करें।
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सपा विधायकों का रुख
सपा विधायकों ने स्पीकर के फैसले पर असंतोष जताया। उनका कहना था कि यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश में स्थित है और छात्रों की सुरक्षा एवं शिक्षा से जुड़ा मामला राज्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि AI रोबोट के इस्तेमाल से जुड़े सवालों पर सदन में चर्चा जरूरी है। विधायकों ने इसे शिक्षा नीति और छात्रों के भविष्य से जोड़कर देखा। सपा का दावा है कि यह मुद्दा सिर्फ एक यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य में प्राइवेट संस्थानों में हो रहे प्रयोगों से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
गलगोटिया यूनिवर्सिटी में AI रोबोट के इस्तेमाल को लेकर पहले भी विवाद हुआ था। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि रोबोट छात्रों से बातचीत कर रहा है और कुछ मामलों में अनुचित व्यवहार की शिकायतें आईं। सपा ने इसे शिक्षा में तकनीक के दुरुपयोग का उदाहरण बताया, जबकि यूनिवर्सिटी ने इसे नवाचार बताया। स्पीकर के फैसले से साफ है कि सदन इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करेगा, क्योंकि यह राज्य सरकार का प्रोग्राम नहीं है।
राजनीतिक मायने
यह घटना विपक्ष और सरकार के बीच तनाव को दिखाती है। सपा मुद्दों को सदन में लाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है, जबकि स्पीकर और सत्ता पक्ष ऐसे मुद्दों को खारिज कर रहे हैं जो राज्य सरकार के दायरे से बाहर हैं। यह बहस शिक्षा, तकनीक और छात्र सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी असर डाल सकती है। फिलहाल स्पीकर का फैसला अंतिम है और सदन में इस पर चर्चा नहीं होगी।
INPUT-ANANYA MISHRA












































